गंगनहर के ऊपर से जा रहे रेलवे ट्रैक पर पैदल जा रहे किशोर ने अचानक ट्रेन को आता देख जान बचाने के लिए गंगनहर में छलांग लगा दी, लेकिन तैरना नहीं जानने के चलते किशोर गंगनहर में बह गया।
गोताखोर गंगनहर में दिनभर उसकी तलाश करते रहे, मगर उसका पता नहीं चला। बृहस्पतिवार को गोताखोर दोबारा आकर गंगनहर में उसकी तलाश करेंगे। वाल्मीकि कालोनी में तुषार (17) अपनी मां और बहन के साथ रहता था। उसके पिता की मौत हो चुकी है।
तुषार घर में इकलौता लड़का था। वह मसूरी स्थित एक स्कूल में स्वीपर का काम करता था। बुधवार सुबह करीब साढे़ सात बजे तुषार स्कूल में काम करने जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब वह गंगनहर के ऊ पर बने रेलवे ट्रैक पर बीच में पहुंचा तो अचानक दिल्ली की ओर से ऊना हिमाचल जनशताब्दी एक्सप्रेस आ गई।
ट्रेन की चपेट में आने से बचने के लिए तुषार ने गंगनहर में छलांग लगा दी थी। वह 200 मीटर तक गंगनहर में हाथ ऊपर कर मदद मांगता रहा, लेकिन उस वक्त गोताखोर या तैराक न होने की वजह से उसे बचाने के लिए कोई भी व्यक्ति नहर में नहीं कूदा।
मामले की सूचना पुलिस को दी गई। मुरादनगर पुलिस ने तैराक बुलाकर गंगनहर में तुषार की तलाश कराई, मगर उसका पता नहीं चल सका। एसओ मसूरी शावेज खां ने बताया कि जल्द ही उसे बरामद कर लिया जाएगा।
उधर, तुषार के नहर में डूबने की सूचना पर मां भी गंगनहर पहुंची। मां ने बताया कि तुषार को तैरना नहीं आता है। तुषार के गंगनहर में डूबने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।