बैंक खाते से नगदी निकालने की लिमिट बढ़ाने का असर पहले ही दिन शहर के विभिन्न बैंकों में देखने को मिला। दोपहर तक ही कई बैंकों में कैश समाप्त हो गया। यही हाल शहर के विभिन्न एटीएम का भी रहा।
ऐसे में एक दिन की छुट्टी के बाद खुले बैंकों के बाहर लंबी लाइन लगाकर बंद हो चुके 1000-500 के नोट बदलवाने और एकाउंट से नगदी निकालने के लिए खडे़ लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।500 व 1000 के नोट बंद होने के बाद बैंकाें में नोट बदलने का सिलसिला सातवें दिन भी जारी रहा। अन्य दिनों से ज्यादा लोगों का रेला बैंकाें में उमड़ा
इस दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा बैंकों के बाहर सुरक्षा-व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस कर्मियों ने भीड़ को संभालने केलिए एक-एक करके ही ग्राहक को अंदर आने दिया। लोगों ने बैंकों के बाहर सुबह 7 बजे से ही लाइन लगानी शुरू कर दी।
आरबीआई द्वारा खाते से कैश लिमिट बढ़ाने के बाद आरडीसी स्थित एचडीएफसी, करुर वैश्य बैंक, नवयुग मार्केट स्थित यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया में 12 से दो बजे के बीच कैश खत्म हो गया। बैंक अधिकारियों ने चेस्ट करेंसी अधिकारियों से कैश की डिमांड की, लेकिन वहां से कैश आने में काफी देरी हुई।
अधिकारियों का कहना था कि ग्राहकों ने अपने एकाउंट से एक बार में 24000 हजार रुपये निकाले। साथ ही 4500 रुपये के नोट भी बदले। ऐसी स्थिति में प्रत्येक ग्राहक ने 29500 कैश लिया, जिस कारण कैश जल्द खत्म हो गया। इससे पहले भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए यूनियन बैंक, पीएनबी ने टोकन सिस्टम को अपनाया।
लोगों को लाइन में उनके खडे़ होने के हिसाब से टोकन दिए गए। इसी के आधार पर नोट बदले गए।बैंकों के साथ एटीएम के भी बाहर लोगों की लंबी कतारें देर शाम तक लगी रही। नवयुग मार्केट स्थित एसबीआई, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस, मालीवाड़ा स्थित आईसीआईसीआई, घंटाघर पर सेंट्रल बैंक, पीएनबी,
संजय नगर में आईसीआईसीआई, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक केएटीएम चालू हालत में थे। हालांकि ये एटीएम ज्यादा देर तक कैश नहीं दे सके। अधिकांश बैंकों के एटीएम बंद ही थे। लोगों का कहना है कि यदि सभी बैंकों के एटीएम से कैश निकालने की सुविधा मिल जाए तो बैंकों के बाहर लाइन खत्म हो जाएगी।
500 व 1000 के नोट बंद होने के बाद लोग प्लास्टिक मनी का उपयोग ज्यादा कर रहे हैं। डिपार्टमेंटल स्टोर हो या मॉल हर जगह लोग डेबिट व क्रेडिट कार्ड से ही खरीददारी कर रहे हैं। किराना मंडी के व्यापारी देवेंद्र हितकारी ने बताया कि लोग शादी के लिए भी जो सामान ले रहे हैं, उसके लिए भी डेबिट कार्ड दे रहे हैं।
दूसरी और कार्ड का ज्यादा उपयोग करने पर सर्वर भी डाउन हो रहा है।मंगलवार को इंडियन ओवरसीज बैंक में जितने लोग नोट बदलवाने या एकाउंट से पैसे निकालने के लिए पहुंचे, उनसे आधार कार्ड व पैन कार्ड मांगा गया। बैंक केएजीएम अनिल कुमार दत्ता ने बताया कि गड़बड़ी रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पैन और आधार कार्ड से ट्रेस करना आसान होता है। इसलिए एक बार जो ग्राहक आएगा वह अगले दिन नहीं आ पाएगा। इससे भीड़ पर कंट्रोल रहेगा।
भाजयुमो ने पिलाई चाय:सब कामकाज छोड़कर बैंकों के बाहर लाइन लगाकर खड़े लोगों को भाजपा युवा मोर्चा के सदस्यों ने चाय पिलाई।
भाजपा नेता गौरव चोपड़ा, राजीव अग्रवाल ने बताया कि सरकार का यह कदम सराहनीय है। लोग लाइन में खड़े रहकर थक जाते हैं। बैंकों के बाहर पानी की भी व्यवस्था नहीं है। लोगों को राहत देने के लिए चाय पिलाई जा रही है।
इस अवसर पर सुरेंद्र नागर, राहुल गिरि, निशांत गुप्ता, पार्षद लवली कौर आदि थे।नोट बंद होने पर ट्रांसपोर्ट कारोबार ठप500 व 1000 के नोट बंद होने के बाद शहर का ट्रांसपोर्टर कारोबार लगभग ठप हो गया है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि काला धन रोकने के लिए तो सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है,
लेकिन इससे पब्लिक और कारोबारियों को भी परेशानी हो रही है। महानगर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पाठक ने बताया कि नोट बंद होने के बाद 50 प्रतिशत तक कारोबार प्रभावित हुआ है। नई बुकिंग मिल नहीं रही। जबकि ड्राइवरों के साथ दैनिक खर्चा निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
कैश की किल्लत ने लोगों को किया परेशान
बैंकों मेें नोट बदलना और जमा कराने को लेकर लोगों को परेशानी कम नहीं हो रही। मंगलवार को भी नगर एवं देहात के बैंकों और एटीएम में कैश की किल्लत रही। इसके चलते दोपहर बाद कई बैंकों और एटीएम पर कैश खत्म हो गया।
गोविंदपुरी और हरमुखपुरी स्थित डाकखानों में दोपहर बारह बजे तक कैश नहीं पहुंचा था। गोविंदपुरी डाकखाने पर लाइन में लगे शिवकुमार ने बताया कि वह सुबह छह बजे यहां आ गए थे। कई घंटे बाद लाइन में खड़े लोगों को बताया गया है कि कैश 12 बजे आएगा। मगर दोपहर एक बजे तक कैश नहीं पहुंचा।
फरीदनगर में एक मात्र सिंडीकेट बैंक है। यहां लाइन मेें खड़े अनवर ने बताया कि लोग सुबह छह बजे से लाइन में खड़े है। बैंक द्वारा उनको बताया गया है कि दोपहर बाद कैश आएगा। सही जवाब नहीें मिलने पर यहां कई बार लोगों ने शोर शराबा किया।
सुराना गांव में मेहरचंद यादव (55) परिवार सहित रहते हैं। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे मेहरचंद गांव स्थित जिला सहकारी बैंक में दो हजार रुपये बदलने पहुंचा। तीन घंटे लाइन में लगने के बाद नंबर आया तो बैंक में कैश खत्म हो गया। इससे क्षुब्ध होकर मेहरचंद हंगामा करने लगा। मौजूद लोगों ने समझाकर उसे घर भेज दिया।
बताया गया कुछ देर बाद घर से मेहरचंद केरोसिन की कैन लेकर पुन: बैंक पहुंचा और रुपये नहीं बदलने पर मैनेजर को आत्मदाह की धमकी दी। इसके चलते बैंक में हड़कंप मच गया। लोगों ने किसान को समझाने का प्रयास किया। हंगामा बढ़ने की सूचना पर साधन सहकारी समिति के सचिव मौके पर पहुंचे और मेहरचंद को दो हजार रुपये देकर शांत कराया।
बताया गया कि रुपये नहीं होने के कारण वह बीमार बच्चों का इलाज नहीं करवा पा रहा था, जिस कारण उसे ऐसा कदम उठाना पड़ा। जिला सहकारी बैंक के मैनेजर रज्जू प्रसाद का कहना है कि किसान मेहरचंद बैंक में केरोसिन लेकर तो आए, लेकिन मजाक कर रहे थे।