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एंटी रोमियो: बेटियों नहीं, अब बेटों को डरना होगा

Mon, 27 Mar 2017 11:55 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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एंटी रोमियो अभियान - फोटो : अमर उजाला
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इसे एंटी रोमियो अभियान का असर ही कहेंगे कि मॉल्स मल्टीप्लेक्स, कॉलेज, स्कूलों के बाहर, सड़कों व बाजारों में मंडराने वाले मनचलों के झुंड अब नजर नहीं आ रहे हैं। लड़कियां तो इससे खुश हैं ही, उनके पैरेंट्स भी इस बदलाव से खासे उत्साहित हैं।

सबसे बड़ी बात तो यह दिख रही है कि अब माता पिता बेटियों को नहीं बेटों को संभलकर रहने की हिदायत दे रहे हैं। अमर उजाला ने इस मुद्दे पर छात्राओं और कुछ पैरेंट्स की राय जानी। लोगों ने कहा कि अभियान तो अच्छा है लेकिन पुलिस पब्लिक फ्रेंडली होने की ट्रेनिंग दिए जाने की जरूरत है।
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भाजपा ने अपने मैनिफेस्टो में महिला और युवतियों से हो रही छेड़छाड़ रोकने के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड बनाने की घोषणा की थी। सरकार बनते ही मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ ने एंटी रोमियो अभियान शुरू करने के पुलिस को आदेश जारी किए।


छात्राओं की सुनिए
- वीएमएलजी की छात्रा रेखा ने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से अच्छी पहल की गई है। इससे महिलाएं, युवतियां, छात्राएं काफी सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

- छात्रा निशा ने बताया कि कॉलेज के बाहर की स्थिति इतनी खराब थी कि कॉलेज आना-जाना मुश्किल हो रहा था। मनचले झुंड बनाकर खडे़ रहते थे। लड़कियों के निकलने पर अश्लील फब्तियां कसते थे। अभियान के बाद से कॉलेज के बाहर शांति हो गई है।

-  छात्रा रौनक ने कहा कि एंटी रोमियो अभियान शुरू होने के बाद से वह काफी सुरक्षित महसूस कर रही हैं। उन्हें अकेले आने जाने में डर लगता था, लेकिन अब कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी मर्जी के मुताबिक घूमने वालों को पुलिस को नहीं पकड़ना चाहिए।

- छात्रा प्रियंका ने बताया कि इस अभियान के बाद से मनचले और शोहदे कॉलेज के बाहर से हट गए हैं। पहले भाई या पापा कॉलेज छोड़ने आते थे। लेकिन अब खुद ही आती हूं। पुलिस यही काम पहले करती तो मनचलों की इतनी हिम्मत नहीं बढ़ती। पैरेंट्स को भी चाहिए कि वे अपने बेटों को सही संस्कार दें।

पैरेंट्स की जुबानी
शिक्षिका रंजना मिश्रा ने कहा कि सरकार की ओर से जो अभियान शुरू किया गया है, वह काफी अच्छा है। लेकिन पुलिस बेवजह किसी सही को न पकड़े। उन्होंने कहा कि उनके दो लड़के हैं, वह दोनों को समझाकर भेजती हैं कि ट्यूशन और स्कूल जाते समय सावधानी बरतें।

शिक्षिका विभा भटनागर का कहना है कि यह सब सरकार की इच्छा शक्ति का परिणाम है। ये वही पुलिस है, जो कुछ माह पहले तक शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेती थी, वही अब एक्शन में नजर आ रही है। हालांकि पुलिस को ऐसे युवाओं को परेशान नहीं करना चाहिए, जो अपनी मर्जी से एक दूसरे के साथ घूमते हैं।

शिक्षिका रजनी ठाकुर ने बताया कि पुलिस को अपनी पावर का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अभियान अच्छा है। महिलाओं के पक्ष में है, लेकिन पुलिस पूछताछ करने के दौरान युवक-युवतियों से शालीनता से बात करे। यदि वो गलत हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करे।
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शिक्षक राघवेंद्र ने कहा कि अभियान से पहले पुलिस को इसके लिए ट्रेनिंग की जरूरत है। ट्रेनिंग के बगैर अभियान के दौरान पुलिस उसका गलत इस्तेमाल करती है और चेकिंग के दौरान गाली-गलौच करते हैं। जरूरत है व्यवहार में बदलाव की।
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