यूपी में करीब 50 लाख राशनकार्डों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। खाद्य एवं रसद मंत्री अतुल गर्ग का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर राशन डीलरों और विभागीय अधिकारियों ने ऐसे लोगों के राशनकार्ड जारी कर दिए जो इसके लिए पात्र ही नहीं हैं।
वहीं, प्रदेश में एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है, जिन्हें सरकारी राशन की जरूरत तो है मगर उनके पास राशनकार्ड ही नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर राज्यमंत्री ने बुधवार को प्रदेश के सभी जिला पूर्ति अधिकारियों की बैठक लखनऊ में बुलाई है।
खाद्य एवं रसद मंत्रालय संभालने के बाद से ही राज्यमंत्री अतुल गर्ग राशनकार्ड को लेकर काफी गंभीर हैं। यही कारण है कि उन्होंने अपने ही जिले गाजियाबाद में करीब एक लाख राशनकार्ड के फर्जी होने की संभावना जताई है।
राज्यमंत्री का मानना है कि फर्जी तौर पर बनाए गए इन राशनकार्डों से सरकारी अनाज को ब्लैक मार्केट में बेचा जाता है। इससे गरीबों का हक तो उन तक पहुंच ही नहीं पाता साथ ही सरकार को भी हर माह करोड़ों का नुकसान होता है।
उधर, राज्यमंत्री के इस अंदेशे को इस बात से भी बल मिलता है कि नोएडा के डीएम ने हाल ही में एक पत्र लिखकर शासन को सूचित किया है कि उनके जनपद में मात्र 30 फीसदी ही सरकारी राशन की आवश्यकता है।
इस मामले में राज्यमंत्री अतुल गर्ग का कहना है कि नोएडा डीएम के इस पत्र के बाद से पता चलता है कि ऐसे ही हालात ज्यादातर जिलों में हो सकते हैं। इसी से पता चलता है कि लंबे समय से सरकारी राशन की कालाबाजारी जारी थी।
इसी के चलते अब 19 अप्रैल को उन्होंने प्रदेश भर के सभी जिला पूर्ति अफसरों की बैठक बुलाई है। बैठक का मुख्य मुद्दा फर्जी और अपात्र लोगों के राशनकार्ड ही होगा। राज्यमंत्री ने बताया कि इस बैठक में गेहूं खरीद अफसरों को भी बुलाया गया है। बैठक में अफसरों से अब तक गेहूं खरीद का हिसाब लिया जाएगा।