कोर्ट केस में फंसे इंजीनियर और बाबू की पैरवी करेगा निगम
गाजियाबाद। नगर निगम के प्रकाश विभाग में तैनात दो इंजीनियर और एक बाबू की कोर्ट में पैरवी अब नगर निगम करेगा। नगर निगम का विधि विभाग उनके पक्ष में वकील खड़ा करेगा। इन इंजीनियरों और बाबू का ‘जुर्म’ इतना भर था कि उन्होंने अधिकारियों के कहने पर प्रकाश विभाग के एक पूर्व इंस्पेक्टर के खिलाफ जांच कर रिपोर्ट दे दी थी। पूर्व लाइट इंस्पेक्टर पर एफआईआर दर्ज हुई तो पुलिस के जांच अधिकारी ने आरोपी बनाए गए लाइट इंस्पेक्टर को क्लीन चिट देकर उल्टा निगम के दो इंजीनियर और एक बाबू को आरोपी बना दिया।
चर्चा है कि पुलिस ने इस मामले में तीनों के खिलाफ चार्जशीट फाइल कर दी है। ऐसे में इन तीनों अफसर-कर्मचारी की मुश्किलें बढ़ सकती है। अब मामले की सुनवाई 28 जून को होनी है। पूर्व लाइट इंस्पेक्टर पर आरोप था कि उन्होंने नौकरी करते समय अपने बेटे के नाम से फर्म रजिस्टर्ड कराकर निगम में ठेके लिए। पार्षद जाकिर सैफी ने भी यह मामला उठाया था। शिकायत मंडलायुक्त तक पहुंची तो जांच कराई गई और पूर्व लाइट इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया। अब निगम के दो इंजीनियर और कर्मचारी को ही आरोपी बना दिया गया। इस मामले में नगर निगम के अधिकारी पैरवी करने से बच रहे थे। अपने अधिकारियों के पक्ष में वकील खड़ा नहीं कर रहे थे। कई दिन से यह फाइल निगम अफसरों के दफ्तरों में घूम रही थी, अपने अधिकारियों-कर्मचारियों की मदद के लिए निगम अधिकारी गंभीर नहीं थे। मंगलवार को नगर निगम पार्षदों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया तो अधिकारियों ने कोर्ट में नगर निगम की ओर से वकील खड़ा करने पर सहमति दी। नगर आयुक्त दिनेश चंद्र ने मंगलवार को फाइल पर हस्ताक्षर पैरवी किए जाने के निर्देश दिए।