कोतवाली पुलिस ने रविवार को नकली घी बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। दो लोगों को गिरफ्तार कर वनस्पति घी और रिफाइंड से तैयार 2100 किलो नकली घी बरामद किया, जबकि पांच हजार लीटर वनस्पति घी और रिफाइंड भी मिला। इस घी की पारस, अमूल, मोहन, मधुसूदन आदि कंपनियों के नकली रैपरों और डिब्बों में भरकर दिल्ली-एनसीआर और गाजियाबाद में सप्लाई की जा रही थी।
एसएचओ धीरेंद्र यादव ने बताया कि घी बनाने वाली कई नामी कंपनियों ने एक विजिलेंस टीम बनाई हुई है, जो शहरों में पता करती रहती है कि उनकी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर कोई नकली प्रोडक्ट तो नहीं बेच रहा। इसी टीम ने पुलिस को सूचना दी थी। एसएचओ ने बताया कि गंदा नाला से पुलिस ने पिंकी को गिरफ्तार किया और पक्की मोरी से कामेश निवासी बुलंदशहर को। कामेश ने गंदा नाला के पास किराए पर मकान लिया हुआ था, जिसमें यह नकली घी तैयार किया जा रहा था।
इसे पक्की मोरी में हॉल सेल में बेचा जा रहा था। दोनों जगह से पुलिस ने नामी कंपनियों के नाम से छपे रैपर, डिब्बे, कनस्तर, कढ़ाही, देसी घी की खुशबू वाला एसेंस भी बरामद किया। पुलिस इस गैंग से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है। बरामद सामान की कीमत करीब 20 लाख है।
ऐसे किया जाता था तैयार
पुलिस गिरफ्त में आरोपियों ने बताया कि वह वनस्पति घी, रिफाइंड और देसी घी की खुशबू वाला एसेंस मिलाकर नकली घी तैयार करते थे। असली घी के रेट में बेचते थे। एक किलो असली घी करीब चार से साढ़े चार सौ रुपये में मिलता है। जबकि यह एक किलो घी करीब सौ रुपये की लागत में बना लेते थे।