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Ghaziabad News: चीनी की महंगाई से प्रभावित हो रहे कंफेक्शनरी उद्योग

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निशा ठाकुर

साहिबाबाद। चीनी की बढ़ती कीमतों ने कंफेक्शनरी उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टॉफी, कैंडी, लॉलीपॉप और अन्य मीठे उत्पाद बनाने वाले उद्यमियों को बढ़ती लागत के बीच कारोबार करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। कच्चे माल की कीमत बढ़ने के बावजूद बाजार में उत्पादों के दाम नहीं बढ़ा पाने से कमाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में बहुत से उद्यमियों ने पहले के मुकाबले उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक कटौती की है।
उद्यमियों के मुताबिक, कंफेक्शनरी उत्पादों में चीनी प्रमुख कच्चे माल में शामिल है। इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। साथ ही पैकेजिंग, बिजली, परिवहन और अन्य जरूरी सामग्री पर होने वाला खर्च भी कारोबार की लागत बढ़ाता है। ऐसे में तैयार उत्पादों की लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में उनकी कीमतों को पुराने स्तर पर बनाए रखना उद्यमियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। साहिबाबाद साइट-4 स्थित नामचीन ब्रांड संचालक शिव कुमार गुप्ता का कहना है कि चीनी के बढ़ते दाम से दिक्कत आ रही है। एक माह से उत्पादन में कटौती की है। वह बताते हैं कि चीनी के रेट अभी घट-बढ़ रहे हैं, रेट स्थायी होने तक दिक्कते रहेंगी। एक मिठाई शॉप के संचालक आशीष गौर का कहना है कि अभी किसी भी आइटम के रेट न बढ़ाना उद्यमियों की मजबूरी है, क्योंकि चीनी का रेट अभी स्थायी नहीं है। उनका कहना है कि चीनी की उपलब्धता भी अभी सीमित है ऐसे में उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
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बाजार में दाम बढ़ाना आसान नहीं
साहिबाबाद साइट चार इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव मुकेश गुप्ता का कहना है कि कंफेक्शनरी उद्योग से जुड़े बाजार में कम कीमत वाले उत्पादों की मांग काफी अहम होती है। लागत बढ़ने के बावजूद उत्पादों के दाम बढ़ाना आसान नहीं है। इससे कारोबार में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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दिवाली पर मिठाइयों की वैरायटी में आ सकती है कमी
चीनी के दाम इसी तरह बने रहे और इसकी उपलब्धता में यदि मुश्किलें आई तो दिवाली पर मिठाइयों की वैरायटी में कमी हो सकती है। उद्यमियों का कहना है कि पूरा उद्योग कच्चे माल की उपलब्धता और उसके दाम पर टिका हुआ है। पूर्व के वर्षों में दिवाली की तैयारी में अतिरिक्त उत्पादन किया जाता था, लेकिन इस बार उद्यमियों ने अभी इसकी शुरुआत नहीं की है।
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