गाजियाबाद में कामर्शियल वाहनों की उम्र तय होने जा रही है। शासन स्तर से कवायद चल रही है कि कामर्शियल वाहनों से एक साथ टैक्स लिया जाए। इससे एक तरफ राजस्व बढ़ेगा। वहीं दूसरी ओर वाहन की मियाद खत्म होने पर उसके परमिट का नवीनीकरण नहीं हो सकेगा।
ऐसे में एनजीटी के नियमों के तहत निर्धारित की गई निश्चित अवधि के बाद डीजल स्वयं ही एनसीआर से बाहर हो जाएंगे। संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार बनते ही यह योजना परवान चढ़ जाए।डीजल के कामर्शियल वाहनों की उम्र 10 वर्ष है, लेकिन समय बीत जाने के बाद भी वाहन चलते रहते हैं।
इसे रोकने के लिए शासन स्तर से नई रणनीति बनाई जा रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अभी तक कामर्शियल वाहन प्रत्येक तिमाही में टैक्स जमा कराते हैं। लापरवाही का आलम ये होता है कि अनेक वाहन तय समय पर आरटीओ ऑफिस पहुंचते ही नहीं। जब उन्हें पकड़ा जाता तब पेनाल्टी लगाकर टैक्स लिया जाता है।
अधिकारी और कर्मचारी के ऊपर से बोझ कम करने के लिए ही यह कवायद हो रही है कि कामर्शियल वाहनों से वन टाइम टैक्स लिया जाए। इससे विभाग को एकमुश्त धनराशि मिल जाएगी। साथ ही ये पता होगा कि वाहन अपने निर्धारित समय के बाद खुद ही एनसीआर से बाहर हो जाएगा।