गाजियाबाद में महिला थाना और परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंच रहे मामलों में भी यह साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के पहले सात महीनों में पारिवारिक विवाद की 1219 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि वर्ष 2026 की समान अवधि में यह संख्या 26.5 प्रतिशत बढ़कर 1542 हो गई।
परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी पुष्पा सिंह के अनुसार, वर्ष 2026 में आए मामलों में से 1204 मामलों में बच्चे भी सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। कई बच्चे माता-पिता के अलगाव, लंबे समय से चले आ रहे विवाद या पुनर्विवाह के कारण मानसिक असुरक्षा और भावनात्मक तनाव से गुजर रहे हैं। हर परिवार की कहानी अलग है, लेकिन बच्चों की पीड़ा लगभग एक जैसी।
केस 1
14 साल का रिश्ता टूटा, बिखरा परिवार
नंदग्राम थाना क्षेत्र के एक मामले में 14 वर्ष पुराने वैवाहिक संबंध टूटने की नौबत आ गई। महिला ने पति पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि वह पिछले दो महीने से पड़ोस में रहने वाले युवक के साथ रह रही थी और पति से तलाक लेकर उससे विवाह करना चाहती थी। इस बीच 11 वर्षीय बेटा और नौ वर्षीय बेटी पिता के साथ रहने लगे। पति-पत्नी अपने-अपने फैसले पर कायम रहे और परिवार बिखरता रह गया।
केस 2
दो शादियां टूटीं, तीन बच्चों का बचपन बंटा
विजयनगर क्षेत्र की एक महिला की पहली शादी वर्ष 2017 में हुई थी, जो दो वर्ष बाद टूट गई। उस समय एक वर्षीय बच्चा पिता के पास रह गया। वर्ष 2019 में महिला ने दूसरी शादी की और इस रिश्ते से दो बच्चे हुए। बाद में वह सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पुराने परिचित के संपर्क में आई और उसके साथ रहने का फैसला कर लिया। अब तीनों बच्चे अपने-अपने पिताओं के साथ रह रहे हैं।
178 परिवारों में बचा रिश्ता
परिवार परामर्श केंद्र में आने वाला हर मामला तलाक तक नहीं पहुंचता। काउंसलिंग के जरिये 178 मामलों में पति-पत्नी के बीच समझौता कराया गया, जबकि 137 मामलों में दंपतियों ने अदालत का रुख किया। शेष मामलों में काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया जारी है।