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डस्टबिन में मिला नवजात, एक बार फिर हुई ममता की हत्या

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डस्टबिन में मिला नवजात, एक बार फिर हुई ममता की हत्या
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गाजियाबाद। तड़के तीन बजे, जब कुछ लोग नींद में थे तो कुछ अपनी ट्रेन आने का इंतजार कर रहे थे। उनके कानों में अचानक से किसी बच्चे के रोने की आवाज पड़ती है। आवाज ऐसी मानो किसी बच्चे को कोई बुरी तरह मार रहा हो। लोगों का ध्यान गया तो उन्होंने इधर-उधर ढ़ूढना शुरू किया। इसपर आभास हुआ कि वहां रखे डस्टबिन से बच्चे के रोने की आवाज आ रही है। उसमें झांककर देखा तो जैसे कलेजा ही कांप गया। उसमें एक नवजात जिसकी नाल तक नहीं कटी थी, जिसके शरीर पर एक कपड़ा तक नहीं था बुरी तरह रो रहा है। फिर कोई निर्दयी मां मासूम को मरने के लिए कूड़ेदान में छोड़ गई थी।
वाक्या है गाजियाबाद के पुराना रेलवे स्टेशन का। सूचना मिलने पर आरपीएफ स्टाफ और एनजीओ की मदद से उस बच्चे को जिला महिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे दिल्ली के जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया था, मगर बच्ची की मौत हो गई।
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आरपीएफ के इंस्पेक्टर पीकेजीए नायडू ने बताया कि सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे प्लेटफॉर्म नंबर एक-दो पर हापुड़ छोर पर बने शौचालय से बच्चे के रोने की आवाज वहां बैठे लोगों को सुनाई दी। उन्होंने वहां जाकर देखा तो नवजात शिशु डस्टबिन में पड़ा था। सूचना पर आरपीएफ स्टाफ और एनजीओ के लोगों को भेजा गया। उन्होंने तत्काल बच्चे को उठाकर अस्पताल पहुंचाया। बच्चे की नाल भी उसके साथ लिपटी थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि एक-डेढ़ घंटे पहले ही उसका जन्म हुआ था। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. दीपा त्यागी ने बताया कि बच्चा प्री मेच्योर था और शरीर का तापमान भी ऊपर नीचे हो रहा था। इसके चलते उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उसे जीटीबी रेफर कर दिया गया था। आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि एनजीओ की मदद से उसे एंबुलेंस से जीटीबी अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया लेकिन बच्ची की मौत हो गई।
आरपीएफ ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए बच्चे की मां का पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन उसका पता नहीं लग पाया।
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