गाजियाबाद। भीषण गर्मी के बावजूद जनपद में चिकनगुनिया का मरीज मिला है। इससे सरकारी व्यवस्था की पोल खुल गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अफसर निजी अस्पताल की उस रिपोर्ट को नकार रहे हैं, जिसमें वसुंधरा के युवक को चिकनगुनिया की पुष्टि की गई है।
वसुंधरा निवासी 29 वर्षीय राजेंद्र कुमार को वैशाली स्थित एक निजी अस्पताल ने 21 अप्रैल को जांच के बाद चिकनगुनिया पॉजिटिव बताया लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल की ओर से गत 24 अप्रैल को भेजी गई मरीज की रिपोर्ट को नकार दिया है।
तेज गर्मी में भी चिकनगुनिया का मरीज मिलने से निजी डॉक्टर इसे चिंताजनक बता रहे हैं। 44 डिग्री के करीब पहुंच रहे पारे के बावजूद चिकनगुनिया के मरीज को लेकर स्वास्थ्य विभाग टेंशन में आ गया है।
हालांकि सरकारी अफसर अब निजी अस्पताल की रिपोर्ट को यह कहकर खारिज कर रहे हैं कि रिपोर्ट रैपिड किट के माध्यम से जांच के बाद तैयार की गई है जबकि जांच एलाइजा किट से होनी चाहिए थी।
सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल का कहना है कि रैपिड किट से जांच के लिए प्राइवेट अस्पतालों को मना किया गया है। अस्पताल को इस संबंध में नोटिस भेजा जाएगा। रैपिड किट से जांच करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि चिकनगुनिया और डेंगू की जांच केवल एलाइजा किट से ही की जाती है।
40 डिग्री तापमान में भी एडीज ब्रीडिंग
आमतौर पर एडीज मच्छर 35 डिग्री से अधिक और 20 डिग्री से नीचे तापमान में जीवित नहीं रह पाते हैं। 40 से 42 डिग्री तापमान में भी एडीज की ब्रीडिंग हो रही है और मच्छर जीवित हैं यह चिंता का विषय है। मच्छरों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के कारण भी यह समस्या आ रही है।
डीएमओ जीके मिश्रा ने बताया कि लोगों की लाइफस्टाइल बदलने के कारण मच्छरों का साइकिल चेंज हो रहा है। गर्मियों में एसी की वजह से घरों और ऑफिसों का तापमान 24 डिग्री से ऊपर नहीं होता और सर्दियों में हीटर चलते रहते हैं, इसके कारण यह समस्या आ रही है।