शासन द्वारा जीडीए में ऑडिट पर एतराज जताने के बाद शुक्रवार को कैग की टीम ने फाइलें प्राधिकरण को वापस कर दीं। पिछले दस दिन से कैग इन फाइलों का ऑडिट कर रही थी।
सूत्रों ने बताया कि फाइलों को वापस किए जाने के बाद जीडीए के कर्मचारियों-अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
हालांकि यह टीम केंद्र सरकार द्वारा जीडीए को आवंटित फंड का ही ऑडिट करने पहुंची थी, लेकिन कई विभागों की फाइलों की जांच शुरू कर देने से जीडीए कर्मियों में यह भय समा गया था कि कैग कहीं उन्हें किसी मामले में ‘लपेट’ न दे। अब तक राज्य सरकार की ऑडिट इकाई से ही विभिन्न मदों में लेनदेन की जांच की व्यवस्था रही है। ऑडिट एजे की रिपोर्ट ही विधानसभा या विधान परिषद में रखी जाती है।
कैग की टीम 25 अप्रैल को जांच के लिए जीडीए आई थी, तब उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया था कि उन्हें जांच का अधिकार नहीं है। दूसरी बार टीम एक एक्ट का हवाला लेकर जांच करने आई तो उन्हें जांच के लिए फाइलें सौंप दी गईं। इसके बाद इस एक्ट के बारे में लॉ रजिस्ट्रार से विचार-विमर्श किया गया।
बृहस्पतिवार रात में जीडीए वीसी को फैक्स से यह सूचना मिली कि प्रमुख सचिव सदाकांत ने महालेखाकार (आर्थिक एवं राजस्व क्षेत्र लेखा परीक्षा) को पत्र लिखकर कहा है कि वह राज्य सरकार या राज्यपाल से अनुमति लेकर ही जांच कर सकते हैं। शुक्रवार को जीडीए सचिव रविंद्र गोडबोले ने बताया कि कैग की टीम ने फाइलें वापस कर दी हैं।