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Ghaziabad News: शस्त्र लाइसेंस बनवाने के लिए कारोबारी ने नौकर और चालक पर चलवा दी गोली

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गाजियाबाद। कारोबारी आरिफ की फर्म के चालक निर्देश और नौकर गुलफाम को बुधवार की रात दस बजे गोली मारे जाने की घटना का बड़ा ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस जांच में पता चला कि आरिफ के कहने पर गोली निर्देश के भाई दिनेश ने मारी थी। तमंचा आरिफ ने लाकर दिया था।
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पुलिस ने आलू चिप्स के कारोबारी आरिफ, दिनेश, निर्देश और गुलफाम को गिरफ्तार कर लिया। चारों सुदामापुरी के निवासी हैं। पुलिस पूछताछ में आरिफ ने बताया कि वह पिस्टल का लाइसेंस बनवाना चाहता था। इसके लिए अपनी जान को खतरे में साबित करना चाहता था। उसने सुना था कि अगर जान पर खतरा नहीं हो तो लाइसेंस नहीं बनता है। पुलिस उसी का शस्त्र लाइसेंस बनानी की संस्तुति करती है, जिसे कोई धमकी मिली हो या जिस पर हमला हुआ हो।
डीसीपी सिटी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आरिफ ने पूरी साजिश तैयार की। उसने बताया है कि साजिश के बारे में निर्देश, गुलफाम और दिनेश को पहले ही बता दिया था। दिनेश ने साजिश के तहत गुलफाम की बांह और निर्देश के पार में गोली मारी। दोनों को गोली छूकर निकल गई।
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साजिश के तहत ही गोली लगने के बाद दोनों ने पुलिस से कहा कि बाइक पर आए बदमाश उनके मालिक (आरिफ) को मारने आए थे और धमकी देकर गए हैं। भागते हुए बदमाशों ने कहा कि आरिफ को कब तक बचाओगे। जैसा उन्होंने तहरीर में दिया, पुलिस ने वैसा ही केस दर्ज कर लिया था।


दोनों को गोली छूकर निकली

इसी से ठनका पुलिस का माथा
पुलिस का माथा यह देखकर ठनक गया कि निर्देश और गुलफाम को गोली छूकर निकली। दोनों ने बताया था कि वह मालवाहक वाहन से फर्म का सामान लेकर जा रहे थे। न्यू लिंक रोड आरओबी पर बाइक पर आए दो बदमाश उन्हें गोली मारकर चले गए। बदमाशों ने गाड़ी रुकवाकर गोली चलाई। डीसीपी ने बताया कि गोली का निशान देखकर शक पैदा हुआ। दोनों के जख्म लगभग बराबर गहरे थे। इस पर दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने सच बता दिया। इसके बाद कारोबारी ने भी जुर्म कुबूल कर लिया।
अपनी कार के शीशे भी तोड़ चुका है कारोबारी
पुलिस ने कारोबारी के बारे में जानकारी कराई तो पता चला कि वह दो बार अपनी कार से शीशे पत्थर से तोड़ चुका है। दोनों बार उसने सूचना दी कि उस पर हमला किया गया। पुलिस जांच में मामला संदिग्ध लगा। हमले के बताए गए समय पर कार के आसपास कोई और नजर नहीं आया, इसलिए केस दर्ज नहीं किया गया था। कारोबारी ने पूछताछ में बताया कि उस पर हमले का केस दर्ज नहीं हुआ, इसलिए उसने कर्मचारियों पर गोली चलवाने की साजिश रची। उसने यू-ट्यूब पर देखा था कि अगर किसी की जान खतरे में हो तो उसका शस्त्र लाइसेंस आसानी से बन जाता है।
एक हजार आवेदन में सिर्फ दस लाइसेंस बने
पिछले साल शस्त्र लाइसेंस के लिए लगभग एक हजार लोगों ने आवेदन किया। इनमें से सिर्फ दस शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए। इससे पहले 2023 में भी 20 से कम लाइसेंस जारी किए गए थे। पिछले तीन-चार साल से लगभग एक जैसी स्थिति है। प्रशासन की ओर से उसी का लाइसेंस जारी किया जा रहा है, जिसकी जान पर खतरा होने की रिपोर्ट पुलिस दे रही है। जिले में लगभग 14 हजार शस्त्र लाइसेंस हैं।
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