नोटबंदी के फैसले के बाद सबसे ज्यादा मार शहर के छोटे दुकानदारों पर पड़ी। शुरुआत में किराना स्टोर, कपड़ा, स्टेशनरी, इलेक्ट्रिकल सहित छोटे-छोटे व्यापारियों की दुकानदारी 60 से 80 फीसदी तक गिर गई है पर अब बाजार में कैश फ्लो होने के कारण व्यापारियों का कारोबार धीरे-धीरे पटरी पर आने लगा है। सराफा बाजार फिलहाल अभी भी बेजार है।
व्यापारियों को उम्मीद है कि जल्द ये हालात काबू में आ जाएंगे।बीते 8 नवंबर को हुई नोटबंदी के बाद से बाजार में उथल-पुथल का माहौल हो गया था। बड़े व्यापारियों के साथ छोटे व्यापारी भी हाथ पर हाथ रखकर बैठे थे, लेकिन बाजार से ग्राहक नदारद थे। व्यापारी नेता संदीप सिंहल का कहना है कि शुरुआत में हर व्यापारी का 80 प्रतिशत तक कारोबार गिर गया था।
लोगों के पास पैसे नहीं थे और वही किराना स्टोर, कपड़ा, स्टेशनरी, इलेक्ट्रिकल सहित छोटे-छोटे व्यापारियों की दुकानदारी 60 से 80 फीसदी तक गिर गई है। किराना व्यापारी संदीप सिहंल ने बताया कि शुरुआत में लोगाें के पास पैसे नहीं थे और न ही व्यापारी कैशलेस ट्रांजेक्शन के बारे में जानते थे। तब थोक मंडी से माल मंगाना भी मुश्किल हो गया। अब स्थिति सुधर रही है।
एसबीआई केरीजनल मैनेजर एसके गोयल का कहना है कि लोगों को जो रुपये मिले हैं वह उसे अपनी जरूरत केमुताबिक खर्च करें। मार्केट में रुपये का फ्लो होते रहना चाहिए। तभी अर्थव्यवस्था आगे बढे़गी।
क्या कहते हैं दुकानदार
- लोगों के हाथ में अब पैसे आ चुके हैं। इसलिए कम ही लोग हैं जो दो हजार का नोट नहीं दिखाते हैं। यदि दवा 100 से 150 रुपये की होती है तो फुटकर पैसे ही मिलते हैं। -बिजेंद्र सिंह, दवा व्यापारी
- नोटबंदी में फोटो स्टूडियो का कारोबार ठप ही हो गया था। अब धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो रहा है। समय को देखते हुए पेटीएम का भी उपयोग कर रहे हैं। -मिंटू सिंह, फोटो स्टूडियो
- छोटे दुकानदार सिर्फकैश पर ही काम करते हैं। शुरुआत में बहुत दिक्कत हुई, लेकिन अब स्थिति सुधर रही है। यदि जरूरत पड़ी तो स्वाइप मशीन भी रखी जाएगी। -सुनील कुमार, बिजली दुकानदार
- कारोबार को सामान्य होने में काफी समय लगेगा पर अब नुकसान नहीं हो रहा है, यह गनीमत है। बाजार में ग्राहकों की भीड़ होने लगी है। -रघु राणा
पेटीएम और स्वाइप मशीन की डिमांड बढ़ी
कैशलेस ट्रांजेक्शन पर ज्यादा जोर दिए जाने की वजह से दुकानदार पेमेंट लेने के लिए पेटीएम व अन्य एप्स के साथ स्वाइप मशीन ले रहे हैं। कपड़ा व्यापारी पारस अग्रवाल का कहना है कि इस वक्त हर ग्राहक के पास डेबिट या क्रेडिट कार्ड होता है। इसलिए स्वाइप मशीन रखना जरूरी भी हो गया है। आरडीसी स्थित चाय विक्रेता प्रिंस का कहना है कि नोटबंदी के बाद पेटीएम का उपयोग किया जा रहा है।
यह अच्छा तरीका है। जिसमें ग्राहक को पेमेंट करने में परेशानी नहीं होती। उधर, मार्केट में स्वाइप मशीन की डिमांड करीब 13 हजार से ज्यादा हो गई है। वहीं पेटीएम को भी चाय वाले से लेकर ड्राई क्लीनर्स, कन्फेक्शनरी की दुकान करने वाले व्यापारी भी अपना रहे हैं।
रविवार को छुट्टी के दिन एटीएम ही बने सहारा
बैंकों में लगातार दो दिन तक छुट्टी होने के कारण लोगों का सहारा एटीएम ही बने। हालांकि रविवार को एसबीआई को छोड़कर कम ही बैंकों के एटीएम से कैश निकला। अधिकाश्ंा एटीएम के शटर डाउन ही रहे। आरडीसी के एचडीएफसी, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, करूर वैश्य बैंक, कैथलिक सीरियन बैंक, पीएनबी के एटीएम में कैश नहीं था।
वहीं, नवयुग मार्केट में सिंडिकेट बैंक, पीएनबी, इलाहाबाद, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में भी लोगों को कैश नहीं मिला।