2012 विधानसभा चुनाव में अमरपाल शर्मा की जीत के साथ ही बसपा का गढ़ बने साहिबाबाद में 2017 चुनाव में बसपा प्रत्याशी को मुंह की खानी पड़ी। चुनाव से पहले कैडर वोट के दम पर जीत का दावा कर रहे बसपा प्रत्याशी जलालुद्दीन जमानत भी न बचा सके।
2012 में बसपा से चुनाव लड़े अमरपाल शर्मा को करीब 125000 वोट मिले थे। इस दौरान उन्होंने करीब 25 हजार वोट से जीत हासिल की थी। पांच साल में बसपा के जितने भी नेता आए सभी ने साहिबाबाद को बसपा का गढ़ बताया।
2017 विधानसभा चुनाव के ऐन पहले पार्टी ने अमरपाल को निष्कासित कर जलालुद्दीन सिद्दीकी को प्रत्याशी बनाया तब भी कैडर वोट के दम पर जीत का दंभ भरा। मगर परिणाम आते ही बसपा का किला पूरी तरह ढह गया। बसपा प्रत्याशी जमानत बचाने के लिए 10 फीसदी वोट तक हासिल नहीं कर सके।
जलालुद्दीन को सिर्फ 41654 फीसदी वोट मिला। हालांकि हार के बाद मतगणना केंद्र से बाहर निकल रहे जलालुद्दीन ने कहा कि हार की समीक्षा करेंगे। चुनाव लड़ने के लिए उन्हें सिर्फ 17 दिन का समय मिला। अगर समय और होता तो चुनाव का हाल कुछ और होता।