गाजियाबाद का इतिहास गवाह है कि भाजपा की सरकार में दो बार यहां के विधायक को प्रदेश की राजनीति में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। 1991, 1993 और 1996 में तीन बार शहर से विधायक रहे बालेश्वर त्यागी को हर बार प्रदेश सरकार ने लाल बत्ती से नवाजा है।
यही कारण रहा कि वह गृह राज्यमंत्री के साथ ही बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री जैसे पदों पर आसीन रहे। लोगों का मानना है कि इस बार पांचों सीटें जीतकर आए गाजियाबाद के विधायकों में से कम से कम तीन विधायकों को लाल बत्ती से नवाजा जा सकता है। ऐसे में लाल बत्ती अगर गाजियाबाद के हिस्से में आती है तो यहां का विकास भी चहुंमुखी होगा।
1991 में बनी भाजपा सरकार में गाजियाबाद के विधायक बालेश्वर त्यागी को लाल बत्ती से नवाजा गया था। हालांकि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद कांड में सरकार गिरने के बाद 1993 में जब दोबारा चुनाव हुए तो बालेश्वर त्यागी को जीत तो मिली, मगर लाल बत्ती नहीं मिली। दरअसल दूसरी बारी में शासन की डोर मायावती के हाथों में थी।
इसके बाद 1996 में हुए चुनावों में एक बार फिर से बालेश्वर त्यागी जीतकर विधानसभा पहुंचे और शहर को फिर एक लाल बत्ती की सौगात मिल गई। बालेश्वर त्यागी ने गृह राज्यमंत्री और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के रूप में बेहतरीन कार्य किया था।इस बार भाजपा के हिस्से में पांचों सीटें आई हैं।
ऐसे में एक बार फिर से गाजियाबाद के लिए लाल बत्ती पक्की मानी जा रही है। फिलहाल कोई विधायक इस मामले में बोल नहीं रहा, मगर सूत्रों की मानें तो सभी विधायक लाल बत्ती के लिए प्रयास कर रहे हैं। इनमें से तीन की प्रबल दावेदारी मानी जा रही है।
शहर विधायक अतुल गर्ग और मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी जहां अपने राजनीतिक परिवार का हवाला देकर लाइन में हैं, वहीं साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा यूपी में सबसे बड़ी जीत हासिल करके इस दावेदारी में शामिल हो गए हैं।
इसी प्रकार महिला विधायक होेने के नाते डा. मंजू सिवाच भी इस दौड़ में हैं। उधर छात्र राजनीति के बाद अचानक ही विधायक चुनकर आए नंदकिशोर गुर्जर भी लाल बत्ती के लिए प्रयासरत हैं।