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Monkey Attack: बंदरों के हमले से स्कूटी सवार छात्र की मौत, समारोह में शामिल होकर घर लौट रहा था कुनाल

Fri, 24 Jun 2022 05:52 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

बी-फार्मा के 21 वर्षीय कुनाल उर्फ गुड्डू पर बंदरों के झुंड ने उस वक्त हमला किया जब वह शादी समारोह से वापस घर आ रहा था। हमले की वजह से कुनाल की  स्कूटी अनियंत्रित होकर गिर गई और सड़क पर पड़ी ईंट से उसका सिर टकरा गया। घायल अवस्था में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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शादी समारोह में शामिल होकर स्कूटी से घर लौट रहे बी-फार्मा के छात्र पर बंदरों के झुंड ने हमला बोल दिया, जिसके कारण स्कूटी अनियंत्रित होकर गिर गई, सड़क पर पड़ी ईंट से छात्र का सिर टकरा गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इकलौते पुत्र की मौत से घर में कोहराम मच गया, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। 

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मोहल्ला जवाहर बाजार निवासी अनिल पहलवान का 21 वर्षीय पुत्र कुनाल उर्फ गुड्डू बी-फार्मा का छात्र था। बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे कुनाल हाईवे स्थित एक मैरिज होम में आयोजित शादी समारोह में शामिल होकर स्कूटी से घर लौट रहा था। रास्ते में कोतवाली के पास गांधी बाजार स्थित लाला गंगा सहाय की धर्मशाला के पास अचानक बंदरों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। बंदरों से बचने के चक्कर में उसकी स्कूटी फिसल गई और सड़क पर पड़ी ईंट से उसका सिर टकरा गया। परिजनों ने उपचार के लिए कुनाल को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृतक घोषित कर दिया। 

नगर पालिका के खिलाफ लोगों में रोष
शहर के बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद की होती है। बजट के लिए पालिका बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास होता है और उसके बाद ठेका छोड़ा जाता है। सुनील गर्ग का कहना है कि पिछले एक दशक से बंदरों को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चला गया है। शहर का ऐसा कोई मोहल्ला, गली नहीं है, जहां बंदरों का उत्पात न हो। आए-दिन बंदरों का झुंड किसी न किसी पर हमला बोल देता है। हालात यह है कि लोगों ने मकानों की छत पर जाना बंद कर दिया है। बच्चे घर के बाहर खेलने से घबराते हैं। पालिकाध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी से शिकायत कर बंदरों को पकड़ाने की मांग की जाएगी। सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक चंदनप्रकाश का कहना है कि रोजाना करीब 45 से 55 लोग बंदर व कुत्तों के काटने से घायल मरीज अस्पताल आते है। जिन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन दिया जाता है। 
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गली मोहल्लों में बंदरों का उत्पात, 300 लोग रोज पहुंच रहे अस्पताल
हापुड़ की हर गली और मोहल्ले में बंदरों का उत्पात चरम पर है, वहीं गांवों में भी अब बंदर परेशानी का सबब बने हुए हैं। जिले के अस्पताल में प्रतिदिन करीब ढाई सौ से तीन सौ लोग रेबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। बंदरों के उत्पात से बचने के लिए लोगों ने घरों की छतों पर लोहे के जाल लगवा लिए हैं। 

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