17-18 घंटे की ड्यूटी, न वीकली ऑफ और न छुट्टी। और न ही त्योहार मनाने केलिए घर जाने की इजाजत। यह चौपट लाइफ स्टाइल है यूपी के पुलिसकर्मियों की। 22 अगस्त को बुलंदशहर पुलिस लाइंस में हुई हृदयविदारक घटना भी इसी कुंठा का नतीजा थी। हालांकि इसके बाद शासन ने 10 दिन में एक ऑफ देने के आदेश किए थे, लेकिन यह व्यवस्था भी पूरी तरह से अमली जामा नहीं पहन सकी है।
पुलिसकर्मियों को सालभर में 30 सीएल, 30 ईएल मिलती हैं। इसके अलावा पूरी सर्विस केदौरान एक साल की मेडिकल लीव मिलती है। कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को तीन दिन तक की छुट्टी थाना प्रभारी या आरआई दे सकते हैं।
14 दिन तक की छुट्टी क्षेत्राधिकारी और इससे ज्यादा एएसपी और एसएसपी सेंशन करते हैं। हकीकत यह है कि अधिकांश पुलिसकर्मियों की सीएल लैप्स हो जाती हैं, क्योंकि वे छुट्टियां ले ही नहीं पाते हैं। त्योहारों से पहले आदेश मिल जाते हैं कि छुट्टियां कैंसल हैं।
पुलिसकर्मियों को अगर परिवार के साथ त्योहार मनाने को मिल जाए तो यह उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं होता है। 10 दिन में एक ऑफ मिलने की हकीकत यह है कि अभी तक थानों में सभी कर्मचारियों का रोस्टर तक नहीं बना है, जिसके तहत उन्हें ऑफ दिया जाना है।
बता दें कि बुलंदशहर में एक कांस्टेबल ने छुट्टी न मिलने पर एक सिपाही की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जबकि दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। बाद में कांस्टेबल ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
दिल्ली की व्यवस्था बेहतर
यूपी से बेहतर दिल्ली की व्यवस्था है, वहां अधिकांश पुलिसकर्मियों की 8-8 घंटे की ड्यूटी लगती हैं। एक थाने में दो एसएचओ होते हैं, एक दिन में रहता है और दूसरा रात में। विदेशों में तो पुलिसकर्मियों का भी फाइव डे वीक होता है।