एसी कोच में रिजर्वेशन कराकर आरामदायक सफर की उम्मीद कर रहे कई यात्रियों को मंगलवार को नॉन एसी कोच में फजीहत झेलनी पड़ी। मंगलवार को तकनीकी कमी के चलते नई दिल्ली-अंबाला इंटरसिटी में एसी चेयरकार कोच ही नहीं लगाया गया।
ट्रेन गाजियाबाद स्टेशन पहुंचने से 10 मिनट पहले स्टेशन पर अनाउंस किया गया कि इंटरसिटी में एसी कोच नहीं लगाया गया, इसके यात्री दूसरे नॉन एसी जनरल सिटिंग कोच में सफर करें। दिल्ली-अंबाला के बीच चलने वाली इस ट्रेन के एसी चेयरकार कोच में सात यात्रियों ने रिजर्वेशन कराया था।
इनमें से पांच यात्रियों ने सहारनपुर और दो ने मुजफ्फरनगर के लिए रिजर्वेशन कराया था। इनके अलावा दिल्ली व अन्य स्टेशनों से भी यात्रियों का रिजर्वेशन था। ट्रेन आने से पहले यात्रियों को जानकारी नहीं थी कि उन्हें एसी कोच में रिजर्वेशन के बावजूद नॉन एसी कोच में सफर करना पड़ेगा।
रेलवे ने इस ट्रेन में एसी कोच (सी-1) की बजाय जनरल सिटिंग कोच लगाया था। सफर शुरू करने से चंद मिनट पहले कोच बदलने की जानकारी मिलने पर यात्रियों को जनरल कोच में सफर करना पड़ा। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक गाजियाबाद से रिजर्वेशन कराने वाले किसी यात्री ने किराया रिफंड नहीं मांगा है।
हालांकि ऐसी स्थिति में अगर यात्री रिफंड लेना चाहे तो उन्हें दे दिया जाता है। यात्री अगर नॉन एसी कोच में सफर करते हैं तो उनसे इस कोच का किराया लेकर बाकी रकम लौटा दी जाती है।
अंबाला इंटरसिटी के एसी कोच की बैटरी खराब हो गई थी। उसका एसी नहीं चल पा रहा था। स्पेयर में कोई अन्य कोच भी नहीं था। ऐसे में जनरल सिटिंग कोच लगाकर ट्रेन का संचालन करना पड़ा। यात्रियों को एसी और नॉन एसी के किराए में अंतर की रकम लौटायी जाएगी। - दिनेश कुमार, डीआरएम, अंबाला डिवीजन
मेरठ रूट की 8 ट्रेनों में लगे इलेक्ट्रिक इंजन, स्पीड बढ़ी
मेरठ-गाजियाबाद रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन हो जाने के बाद इस रूट पर चलने वाली 8 ट्रेनें अब इलेक्ट्रिक इंजन के साथ दौड़ने लगी हैं। इलेक्ट्रिक इंजन लगने की वजह से अब इन ट्रेनों की स्पीड में भी थोड़ा इजाफा हुआ है। जल्द ही इस रूट पर शालीमार, उत्कल समेत अन्य ट्रेनों में भी इलेक्ट्रिक इंजन लगाने की तैयारी है।
रेलवे ने बीते महीने ही इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया था। इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद सबसे पहले इलेक्ट्रिक मालगाड़ियों को दौड़ाया गया। बीते महीने ही आनंद विहार-मेरठ रूट पर मेमू ट्रेन का संचालन भी शुरू कर दिया गया था।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अब इस रूट पर गोल्डन टैंपल, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक-हरिद्वार एक्सप्रेस, बांद्रा-हरिद्वार एक्सप्रेस, देहरादून-बांद्रा टर्मिनल एक्सप्रेस, कोच्चुवेली-देहरादून एक्सप्रेस, जालंधर सुपर एक्सप्रेस इलेक्ट्रिक इंजन के साथ दौड़ने लगी हैं। इलेक्ट्रिक इंजन लगने से ट्रेनों की स्पीड में सुधार हुआ है। हालांकि ट्रेनों के टाइम शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया गया है।