वर्षों की काली कमाई को सफेद करने के लिए कृषि भूमि को सबसे बड़ा जरिया बनाया गया। बीते छह सालों में सबसे ज्यादा कृषि भूमि की व्यक्तिगत नाम पर खरीद हुई है। किसी की नजर में न आए इसके लिए सारी खरीद टुकड़ों में की गई। वो भी किसी एक नाम पर नहीं बल्कि कई नामों पर। आयकर विभाग ऑपरेशन क्लीन प्रॉपर्टी के तहत रिकार्ड खंगाल रहा है।
करीब 150 से ज्यादा मामले चिन्हित किए जा चुके हैं।जुलाई से आयकर विभाग ताबड़तोड़ छापामारी करने की तैयारी में है। विभाग में खंड की टीमों के साथ इंटेलिजेंस विंग गोपनीय सूचना जुटा रही है। कुछ मामलों में बीते छह साल तक का आडिट भी किया जा रहा है।
इसी आडिट से विभागीय टीम को कुछ अहम साक्ष्य हाथ लगे हैं, जिससे पता चला चला है कि काला धन सफेद करने के लिए अधिकारियों, ठेकेदारों और कुछ व्यापारियों ने जमकर कृषि भूमि खरीदी है। सूत्र बताते हैं कि एक अधिकारी ने वर्ष 2012 से 2015 के दौरान करीब 70 बीघा जमीन अपने व परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदी है।
इसी जमीन से सालाना आठ से 10 लाख रुपये की आय दिखाई गई, लेकिन बीते साल अचानक से 50 लाख रुपये की आय दिखाई गई।विभागीय अधिकारियों का मानना है कि नोटबंदी के दौरान बड़ा पैसा खपाने के मकसद से कृषि आय बढ़ाकर दिखाई गई। इसी तरह के काफी मामले आयकर विभाग की पकड़ में आए हैं जिन पर नोटिस के जरिए कार्रवाई शुरू हो गई है।
साथ ही कुछ लोगों पर छापामारी के जरिए कार्रवाई की तैयारी है।आयकर विभाग के लिए आने वाले समय में कुछ दिक्कतें खत्म होने जा रही हैं। खासकर किसी व्यक्ति की संपत्ति से जुड़ी जानकारी जुटाने जैसे मामलों में अब हर व्यक्ति को अपनी संपत्ति आधार नंबर से लिंक करनी होगी। इसको लेकर केंद्र की तरफ से आदेश जारी हो चुका है।
ऐसे में सभी लोगों का एक निर्धारित अवधि में अपनी हर संपत्ति (भूमि) आधार से लिंक करनी होगी। आयकर विभाग के अधिकारी मानते हैं कि इससे किसी भी व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाना आसान होगा।