गाजियाबाद। जिला जज की कोर्ट में 29 अक्तूबर को किए गए लाठीचार्ज के विरोध में हड़ताल पर चल रहे वकीलों ने मंगलवार को न्यायिक कार्य करने की घोषणा की है। सोमवार को पश्चिम उत्तर प्रदेश के 22 जिलों की बार के प्रतिनिधियों की वर्चुअल बैठक के बाद इसका निर्णय लिया गया है।
गाजियाबाद के वकीलों ने कहा कि जिला जज की कोर्ट का बहिष्कार जारी रहेगा। चेतावनी दी गई कि अगर 21 दिन के भीतर जिला जज अनिल कुमार को नहीं हटाया जाता है तो 22वें दिन से प्रदेश के सभी जिलों में अधिवक्ता हड़ताल पर चले जाएंगे।
इससे पहले यूपी, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के वकीलों ने गाजियाबाद में 16 नवंबर को महासम्मेलन में करके आठ दिन के लिए हड़ताल स्थगित करने का फैसला लिया था लेकिन यह 24 घंटे भी टिक नहीं पाया था। गाजियाबाद के वकीलों ने इस फैसले का विरोध कर दिया था। इस पर 17 को हड़ताल जारी रखने की घोषणा कर दी गई थी।
इस बार 21 दिन हड़ताल स्थगित करने के फैसले के बारे में गाजियाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा ने बताया कि 14 नवंबर को वकीलों का प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में प्रशासनिक न्यायमूर्ति से मिला था। इसके बाद शुक्रवार को प्रतिनिधिमंडल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से प्रयागराज से मिला था। बातचीत के दौरान मुख्य न्यायमूर्ति ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही कहा कि हड़ताल समाप्त किए जाने के बाद ही कार्रवाई किया जाना संभव है। उनसे मिले आश्वासन पर हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। यदि उनकी मांग को नहीं माना गया तो वह तीन सप्ताह के बाद फिर से आंदोलन शुरू करेंगे।
हड़ताल स्थगित करने पर भड़के वकील
जैसे 16 नवंबर को आठ दिन के लिए हड़ताल स्थगित करने का बड़ी संख्या में वकीलों ने विरोध किया था, वैसे ही इस बार भी किया गया है। तीन सप्ताह के लिए हड़ताल स्थगित कर दिए जाने का पता चलते ही बार सभागार के बाहर वकील इकट्ठा हो गए। उन्होंने कहा कि इस तरह से आंदोलन समाप्त करना ठीक नहीं है। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि न्यायाधीश से जो आश्वासन मिला है, उस पर भरोसा करके यह निर्णय लिया गया है।
पुलिस ने दर्ज किए हैं चार केस
पुलिस ने वकीलों पर लाठीचार्ज 29 अक्तूबर को किया था। यह कार्रवाई जिला जज की कोर्ट में हंगामे के बाद हुई थी। कुछ वकीलों की जिला जज से बहस हो गई थी। इसके बाद ही पुलिस बुलाई गई थी। इसके बाद कचहरी में बवाल हुआ था। पुलिस ने वकीलों पर दो केस दर्ज किए थे। इनमें कचहरी की चौकी फूंकने का भी आरोप है। आंदोलन के दौरान वकीलों ने कचहरी के बाहर जाम लगाया था। पुलिस ने इसके भी दो केस दर्ज किए थे।
04 लाख मामले
हैं कोर्ट में लंबित
गाजियाबाद की अदालतों में चार लाख मामले लंबित हैं। हड़ताल से इनकी सुनवाई प्रभावित हो रही है।
रोज 10 हजार केस सुनवाई के लिए लगते हैं। चार नवंबर से इन सभी मामलों में सिर्फ तारीख लग रही है।
आम दिनों में 100 से 150 केस जमानत के आते हैं। हड़ताल की वजह से किसी की भी जमानत नहीं हो पा रही।
हड़ताल लंबी खिंच जाने से जेल में कैदियों की संख्या बढ़ गई है। पुराने निकल नहीं पा रहे जबकि नए बढ़ गए हैं।
हड़ताल की वजह से तहसीलों में बैनामे भी नहीं हो पा रहे। इससे शासन को स्टांप शुल्क का नुकसान हो रहा है।
हड़ताल में कचहरी के फोटो स्टेट करने वाले और टाइपिस्ट भी शामिल हैं। उनके लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है।