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Ghaziabad News: उमस भरी गर्मी में घर-घर पोलियो की खुराक देना बनी चुनौती

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जिला महिला अस्पताल में बच्चे को पोलियो की दवा पिलाती चिकित्सक। संवाद
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गाजियाबाद। जिले में लगातार बढ़ रही उमस भरी गर्मी के बीच सात दिवसीय घर-घर पोलियो अभियान स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। रविवार को बूथ पर आयोजित पोलियो अभियान के बाद सोमवार से घर-घर स्वास्थ्य कर्मी पोलियो से बचाव की खुराक पिला रहे हैं। सात दिन में लगभग 4.78 लाख बच्चों को ड्राप्स पिलाई जानी है।
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अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज होने से फील्ड में काम करने वाली टीमों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि अभियान को सफल बनाने की तैयारी पूरी है। सात दिनों तक स्वास्थ्य कर्मी और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो से बचाव की खुराक पिलाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा इस जीवन रक्षक खुराक से वंचित न रहे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के दौरान जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष टीमें तैनात की जाएंगी। बूथ दिवस के बाद घर-घर जाकर उन बच्चों को भी पोलियो की दवा पिलाई जाएगी जो किसी कारण से बूथ तक नहीं पहुंच सके। इसके लिए टीमों को पहले से तैयार माइक्रोप्लान के अनुसार क्षेत्रों का आवंटन किया गया है। प्रत्येक टीम को प्रतिदिन निर्धारित संख्या में घरों तक पहुंचकर बच्चों को दवा पिलाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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पोलियो अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि मौसम चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सभी टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य जिले के प्रत्येक पात्र बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाना है। इसके लिए टीमों को पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन, कोल्ड चेन की व्यवस्था और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि जब स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर पहुंचे तो बच्चों को पोलियो की दवा अवश्य पिलाएं और अभियान में सहयोग करें। डॉ. गुप्ता ने बताया कि गर्मी और उमस को देखते हुए फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित रूप से पानी पीने, धूप से बचाव करने और समय समय पर विश्राम करने की सलाह दी गई है ताकि वे बिना किसी परेशानी के अभियान पूरा कर सकें।
सीएमओ डॉ. सचिन वैश्य का कहना है कि जनसहयोग से ही अभियान पूरी तरह सफल होगा। यदि किसी घर में टीम के पहुंचने के समय बच्चा मौजूद नहीं हो तो अभिभावक बाद में टीम से संपर्क कर खुराक अवश्य दिलाएं।
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