गाजियाबाद। लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में दर्ज मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। विशेष पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश नीरज गौतम ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता ने कोर्ट में अपने पहले दिए गए बयानों का समर्थन नहीं किया। इसके चलते अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसके अलावा किशोरी के पिता की अर्जी में विरोधाभास पाया गया है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में आदि उर्फ अक्षय उर्फ रोनू और अरविंद के खिलाफ अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन के अनुसार 18 जनवरी 2025 को किशोरी के पिता ने शिकायत दी थी कि उनकी करीब 17 वर्षीय बेटी को आरोपी आदि बहला-फुसलाकर साथ ले गया। बाद में दी गई दूसरी तहरीर में अरविंद पर किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में गवाही देते हुए किशोरी ने कहा कि वह अपनी मर्जी से आदि के साथ गई थी और किसी भी आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती या दुष्कर्म नहीं किया। उसने यह भी बताया कि पहले जो बयान दिलाए गए थे, वे उसने अपने घरवालों के दबाव में दिए थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में पीड़िता का बयान ही सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य था, लेकिन उसने अदालत में अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। इसके अलावा जांच के दौरान भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं की समुचित जांच नहीं की गई। ऐसे में आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करना संभव नहीं हो सका।