बुलंदशहर के साथ पूरे पश्चिमी यूपी में था बलराज का खौफ
- कई रंगदारी के मामलों में दर्ज ही नहीं हो सकी थी एफआईआर
- सिकंदराबाद, औरंगाबाद सहित जनपदभर में फैला हुआ था नेटवर्क
आशीष शुक्ला
बुलंदशहर। आतंक का पर्याय बन चुका बलराज भाटी का नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में फैला हुआ था। रंगदारी वसूलना और न देने पर हमला करना उसका व उसके साथियों का बाएं हाथ का खेल था। बलराज के एनकाउंटर में ढेर होने से जनपद के व्यापारियों ने भी राहत की सांस ली है। हालांकि जुबां खोलने से वह बच रहे हैं।
2007 में पहली सुपारी लेने के बाद सुपारी किलर बनने वाला बलराज भाटी अपने गैंग पर भरोसा करता था। अपने गुर्गों के जरिए बलराज जनपद सहित पश्चिम के विभिन्न जिलों में व्यापारियों के लिए सिर दर्द बना हुआ था। फोन पर भाटी का नाम लेकर रंगदारी मांगी जाती थी। लाखों और करोड़ों रुपयों में रंगदारी की रकम की मांग की जाती थी। मांग पूरी न होने पर हत्या और हमले किए जाते थे। सिकंदराबाद, शिकारपुर, औरंगाबाद और नगर क्षेत्र में भी कई मामले ऐसे हैं, जब बलराज भाटी के नाम से रंगदारी मांगी जा चुकी है। हैरत की बात है कि अधिकतर मामलों में पीड़ित डर की वजह से एफआईआर ही दर्ज नहीं कराते थे। बलराज के खौफ से व्यापारी रंगदारी दे दिया करते थे और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाती थी। यही नहीं भाटी का क्षेत्र में जबरदस्त नेटवर्क भी था। उसके गुर्गे क्षेत्र में उसके नाम से काम करते थे। भाटी के कई गुर्गे जिला कारागार में बंद हैं।
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औरंगाबाद का अन्नी था खास गुर्गा
औरंगाबाद क्षेत्र निवासी अन्नी गुर्जर बलराज का खास गुर्गा था। बलराज के इशारे पर अन्नी अपने ही इलाके में व्यापारियों से रंगदारी मांगता था। अप्रैल 2013 में गांव तोमड़ी निवासी मेडिकल स्टोर संचालक प्रमोद कुमार शर्मा की हत्या उनकी पवसरा रोड स्थित दुकान पर ही कर दी गई थी। उसने बलराज के नाम पर अन्नी को 50 हजार की रंगदारी नहीं दी थी। दिसंबर 2016 में मोहल्ला नई बस्ती निवासी पशु चिकित्सक डाक्टर अतर सिंह सैनी को 2 लाख रूपये न देने पर अन्नी गुर्जर ने अपने शूटरों से व्यापारी की हत्या करा दी थी। व्यापारी की हत्या के बाद काफी बवाल हुआ था। इससे पहले अन्नी ने मेडिकल स्टोर संचालक नीरज अग्रवाल पर भी गोलियां चलवाई थी। वह बाल-बाल बच गया था। बीते दिनों पुलिस ने 50 हजार के इनामी अन्नी को दबोच कर जेल भेज दिया था।
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प्राणगढ़ के कई लड़के करते थे इशारों पर काम
बलराज का पहला साथी सोनू प्राणगढ़ का ही निवासी था। सोनू के बाद एक-एक कर बलराज ने गांव के कई लड़कों को अपना शागिर्द बना लिया था। सूत्रों की मानें तो कई बार बलराज को क्षेत्र में देखा भी गया था, लेकिन पुलिस के हाथ आने से पहले ही वह भाग निकलता था।
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12 साल से पुलिस के पास था सिर्फ एक फोटो
जिला पुलिस के पास मोस्ट वांटेड अपराधी बलराज का केवल एक ही फोटो था। यह फोटो पुलिस के पास तब आया था जब पुलिस ने बलराज को एक हत्या की कोशिश के मामले में दबोचा था। इसके अलावा कोई अतिरिक्त फोटो पुलिस के पास नहीं था। 12 साल तक पुलिस एक ही फोटो के आधार पर बलराज को ढूंढती रही थी।