गाजियाबाद। जीएसटी लागू होने से पहले जीएसटीएन पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। ऐसे में जिले के अंदर करीब 6566 कंपनियों व फर्मों ने पोर्टल पर माइग्रेट करने से हाथ खड़ा कर लिए हैं और लिखित तौर पर अपना पंजीकरण सरेंडर कर दिया है।
इनमें से सबसे अधिक फर्म सर्विस टैक्स के अधीन आने वाली हैं, जिन्होंने जीएसटीएन पंजीयन लेने से मना कर दिया है। गाजियाबाद में सर्विस टैक्स अदा करने वाली 6707 कंपनियां व फर्में सेंट्रल एक्साइज के अधीन पंजीकृत थीं, जिन्हें नियमानुसार जीएसटीएन पोर्टल पर पंजीयन कराना था।
अब इनमें से करीब 6400 ने पोर्टल पर पंजीयन करने से इनकार कर दिया है। इन कंपनियों ने विभाग में पंजीकरण निरस्त करने के लिए लिखित प्रत्यावेदन दिया है। उधर, सेंट्रल एक्साइज अदा करने वाली 1200 फर्मों में से 166 अब तक लिखित तौर पर अपना पंजीयन सरेंडर कर चुकी हैं।
वाणिज्य कर के कमिश्नर राजेंद्र सिंह का कहना है कि आने वाले एक-दो दिनों में जीएसटीएन पंजीयन को लेकर सारी स्थिति साफ हो जाएगी क्योंकि काफी सारी कंपनियों के माइग्रेट किए जाने संबंधी काम पाइप लाइन में हैं। हालांकि लाइसेंस सरेंडर करने वाली अधिकांश फर्में लंबे समय से कोई टैक्स नहीं दे रही थीं। बस उन्होंने सेंट्रल एक्साइज विभाग से अपना पंजीयन ले रखा था।
जीएसटी सर्वर डाउन
जीएसटी पोर्टल पर आनलाइन टैक्स भरने की प्रक्रिया से जुड़ी टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। एक जुलाई से जीएसटी लागू होना है, उससे पहले केंद्र सरकार हर पैमाने पर जीएसटीएन पोर्टल की जांच कर लेना चाहती है। बताया जा रहा है कि अब तक सर्वर डाउन होने की समस्या सबसे बड़ी है, जिसके चलते लोगों को भारी समस्या आ रही है।