आवास विकास परिषद की मंडोला विहार की बहुमंजिला योजना के टेंडरों में एक बार फिर अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच साठगांठ के आरोप लगे हैं। डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन का आरोप है कि योजना में सिर्फ 25 फ्लैटों के आवेदन आए हैं, मगर साठगांठ कर योजना के लिए 556 करोड़ रुपये के टेंडर छोड़े गए।
इतना ही नहीं परिषद ने करीब 500 करोड़ की धनराशि कंस्ट्रक्शन कंपनी को एडवांस के रूप में जारी दी। इससे परिषद के 500 करोड़ फंस गए हैं। आवास विकास परिषद ने सितंबर 2015 में मंडोला विहार योजना में बहुमंजिला योजना लांच की थी।
इस 16 मंजिला योजना में 1856 टू और थ्री बीएचके फ्लैट बनाए जाने हैं, जिनकी कीमत 35-43 लाख रुपये के बीच रखी गई थी। मगर योजना के लिए परिषद को सिर्फ 40 रजिस्ट्रेशन मिले थे। इसके बाद भी योजना के निर्माण के लिए 556 करोड़ रुपये के टेंडर छोड़े गए।
टेंडर एक बड़ी कंपनी को दिए गए, जिसे निर्माण के लिए तुरंत 90 फीसदी (करीब 500 करोड़ रुपये) धनराशि जारी कर दी गई। योजना का निर्माण तो शुरू हुआ, मगर 40 में से 15 लोगों ने आवेदन वापस ले लिए हैं।
डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय अग्निहोत्री ने बताया कि न के बराबर आवेदन आने पर भी 500 करोड़ की धनराशि जारी कर दी गई है। कई अधिकारियों ने साठगांठ कर यह धनराशि जारी करर्वाई है। इसकी शिकायत आवास आयुक्त से की गई है।
अधिकारी बोले, नियमों के अनुरूप जारी की है धनराशि
आवास आयुक्त आरपी सिंह ने बताया कि जो भी आवंटन हुए हैं, वो नियमानुसार हैं। नियमों के अनुसार ही धनराशि जारी की गई है। अगर किसी प्रकार की शिकायत की गई है तो उसकी जांच की जाएगी।
किस्तों में जारी होती है धनराशि
डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि सेल्फ फाइनेंस स्कीम में टेंडर जारी होने के बाद किस्तों में धनराशि निर्माण एजेंसी को जारी की जाती है। मगर इस बहुमंजिला स्कीम में एकमुश्त बड़ी धनराशि का भुगतान कंस्ट्रक्शन कंपनी को किया गया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि एकमुश्त भी राशि जारी की जा सकती है।