हवा में बढ़ रही धुंध की मात्रा से दो महीने तक लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। फसलों की थ्र्रेसिंग के चलते दो महीने तक हवा में धूल और धुंध के कण ज्यादा रहेंगे। इससे लोगों को सांस, त्वचा और आंख संबंधी बीमारियां बढ़ जाएंगी।
एनसीआर की हवा में प्रदूषण का ग्राफ बहुत ज्यादा है। पीएम की मात्रा अपने मानक 50 क्यूएम की बजाय 275 तक पहुंच गई है। फसलों की थ्रेसिंग के चलते हवा में धूल और धुंध बहुत ज्यादा घुल रहे हैं। इससे पीएम की मात्रा बढ़कर 400 क्यूएम तक पहुंच गई है। इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ना शुरू हो गया है।
हवा में धूल कणों के बढ़ने से लोगों को नजला, खांसी और फेफड़ों संबंधी बीमारियां बढ़नी शुरू हो गई हैं। ऐसी हवा में सांस लेने से लोगों को कुछ देर बाद ही परेशानी होने लगती है। इसके कारण सांस नली, फेफड़ों की परेशानियां, आंखों में जलन, त्वचा में एलर्जी और हाई बीपी की समस्याएं भी होने लगी हैं।
वरिष्ठ चिकित्सक डा. जीवी सिंह के अनुसार धूल में पीएम 10 से पीएम 2.5 तक के पार्टिकल मिले हैं। इनको मुंह पर मास्क लगाकर या कपड़ा बांधकर ही रोका जा सकता है। थ्रेसिंग के दौरान दो-तीन महीने ज्यादा बचाव की जरूरत है। हवा में तैरती यह धूल बारिश के बाद ही नियंत्रित हो सकेगी।