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Ghaziabad News: 37 हजार ने तीन महीने से ज्यादा समय तक जमा नहीं कीं किश्तें, खाता हुआ एनपीए

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गाजियाबाद। स्वरोजगार के लिए ऋण देकर प्रोत्साहन देने की योजनाओं को कुछ उपभोक्ता पलीता लगा रहे हैं। इन लोगों ने बैंक से ऋण लेने के बाद उसकी किश्तों का समय पर भुगतान नहीं करके बैंकों की टेंशन बढ़ दी है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत करीब 1 लाख 20 हजार उपभोक्ताओं को जिले की विभिन्न बैंकों से ऋण दिए गए हैं। लीड बैंक मैनेजर बुद्धराम ने बताया कि करीब 37 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किश्तें जमा नहीं की हैं। ऐसे में ये खाते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) यानी गैर निष्पादित परिसंपत्ति हो गए हैं।
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एलडीएम ने बताया कि मौजूदा समय में वर्तमान में 37,688 ऋण खाते एनपीए हो चुके हैं। इन खातों पर करीब 205 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। तीन महीने तक भुगतान नहीं करने से ये खाते एनपीए हो गए हैं। हालांकि कुछ खाते ऐसे हैं, जिसमें पिछले कई वर्षों से कोई भुगतान जमा नहीं किया गया है। इससे बैंकों को काफी नुकसान हो रहा है। इसका सीधा असर ऋण लेने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ता है। बैंकों की ओर से रिकवरी के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता यदि समय से ऋण चुकाते हैं तो कई फायदे हैं। न केवल व्यक्ति की वित्तीय विश्वसनीयता बनी रहती है बल्कि बैंकिंग व्यवस्था भी मजबूत होती है।
चार श्रेणियों में दिए जाते हैं प्रधानमंत्री मुद्रा लोन
शिशु में 50 हजार, किशोर में 50 हजार से 5 लाख, तरुण में 5 लाख से 10 लाख और तरुण प्लस श्रेणी में 10 से 20 लाख रुपये तक का ऋण प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत दिए जाने की व्यवस्था है। एलडीएम का कहना है कि यदि डिफॉल्ट खातों की संख्या लगातार बढ़ती रही तो इससे भविष्य में ऋण वितरण और बैंकिंग व्यवस्था दोनों पर असर पड़ सकता है।
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