सूत्रों के अनुसार सीबीआई की पूछताछ में बंधनमुक्त आईटी विशेषज्ञों ने बताया कि उन्हें म्यांमार से कॉल करके विदेश में नौकरी का झांसा देकर बुलाया गया। जहां इन्हें अपने-अपने क्षेत्र के लोगों से उनकी ही भाषा में बात कर साइबर ठगी करने को कहा गया। विरोध करने पर उन्हें यातनाएं दी गईं और कई दिनों तक भूखा प्यासा रखा गया। उन्हें मोहड़ी नामक शहर में बंधक बनाया गया था।
कई दिनों तक भूखे प्यासे रहने पर वह साइबर ठगी करने को तैयार हुए। उन्हें म्यावाड़ी नाम स्थान पर करीब 40 दिनों तक प्रशिक्षण भी दिया गया। जिसके बाद पहले इनका इस्तेमाल कॉलिंग करने और सीनियर को सक्षम अधिकारी बताकर कॉल ट्रांसफर करने का काम दिया गया। इसके बाद उनसे डिजिटल अरेस्ट, पुलिस थ्रेट फ्रॉड, फोन हैक, कस्टमर केयर फ्रॉड, शेयर ट्रेडिंग और टेलीग्राम टास्क फ्रॉड करने के लक्ष्य दिए जाने लगे। दिन में तीन सफल कॉल न होने पर उन्हें पीटा जाता था और लक्ष्य पूरा करने का दबाव डाला जाता था।
भाषाओं के अनुसार मिली सूची
साइबर ठगों ने जो जिस क्षेत्र का था और वहां की भाषा का ज्ञान रखता था, उसे उसी क्षेत्र की सूची नाम और नंबर सौंपा जाता था। सूत्रों की मानें तो बंधनमुक्त हुए कुछ लोग आईटी विशेषज्ञ भी नहीं हैं। कुछ ऐसे हैं जो वहां साइबर ठगी में सहायता करते थे। जैसे भारतीय बैंक खाते प्राप्त करने के लिए लोगों से दोस्ती करने और उन्हें लालच देकर बैंक खाते मुहैया कराने का काम भी दिया गया। महिलाओं से सेक्सटॉर्सन फ्रॉड कराया गया।
संबंधित वीडियो