तालाब से मछली पकड़ने पर शुरू हुई खूनी रंजिश
- बलराज ने जीजा की दावत को गांव के तालाब से पकड़ ली थी मछली
- पप्पू ने बलराज को पहुंचा दिया था जेल
- पुलिस की पिटाई और पप्पू कटार से दु्श्मनी के बाद बलराज बना था गैंगेस्टर
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
शिकारपुर के गांव ढूंसरी निवासी कुख्यात बदमाश बलराज के अपराध की दुनिया में कदम रखने की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। घर आए जीजा को मछली और शराब की दावत देने की तैयारी में गांव के तालाब से मछली पकड़ने पर हुए विवाद ने उसकी जिंदगी बदल दी और वह जरायम की दुनिया में उतर गया।
ग्रामीणों की मानें तो बलराज का बड़ा भाई फौज में है, वह अपने परिवार के साथ वहीं रहता है। छोटा भाई बलराज सीधे स्वभाव का था। पिता गजराज खेती करते थे। बलराज की बहनों की शादी हो गई थी। वर्ष 2004 में बलराज और पप्पू कटार के बीच दुश्मनी का बीज पनपा था। बलराज की बहन व जीजा वर्ष 2004 में उसके घर आए हुए थे। बलराज ने अपने जीजा को दावत देने को गांव के ही एक तालाब से मछली पकड़ ली थी। तालाब पर उस समय क्षेत्र में अपनी पैंठ जमाने वाला पप्पू कटार दावा ठोकता था। मछलियों पर पप्पू कटार अपना अधिकार समझता था। ग्रामीणों ने बताया कि जिस तालाब से मछली निकालने को लेकर विवाद पनपा था उस पर कटार अपना दावा ठोकता था और बलराज उस तालाब को गांव वालों का तालाब बताता था। बलराज के मछली पकड़ने से नाराज पप्पू ने साथियों संग बलराज को पीटा और फिर पुलिस से भी पिटवाया था। महीनों तक बलराज बिस्तर पर रहा और पप्पू से बदला लेने की योजना बनाता रहा। वर्ष 2007 में बलराज की दोस्ती सिकंदराबाद के गांव प्राणगढ़ निवासी बदमाश सोनू से हुई। दोनों ने पहली हत्या की सुपारी ली, लेकिन अपने पहले ही मिशन में वह फेल रहा और हत्या की कोशिश के मामले में जेल गया। जेल में बलराज की मुलाकात कुख्यात अपराधी सुंदर भाटी से हुई थी। जेल के अंदर ही बलराज सुंदर भाटी का खास बन चुका था।
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2009 से शुरू की हत्या की वारदातें
जेल से छूटने पर उसने 2009 में सिकंदराबाद थाना क्षेत्र निवासी व्यक्ति जयप्रकाश की सुपारी ली थी और हत्या कर दी। तीन साल तक बलराज शांत रहा और दिसंबर 2012 में शिकारपुर क्षेत्र में ही उसने पप्पू और उसकी पत्नी सुनीता की गोली मारकर हत्या कर दी। वर्ष 2013 में बलराज ने कुख्यात अपराधी नंदू उर्फ रावण की 11 फरवरी 2013 को बिजनौर में पुलिस कस्टडी में ही गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। पप्पू का भाई गुलाब अपने भाई की हत्या में मुख्य गवाह और वादी बना था। दिसंबर 2013 में बलराज ने साथियों संग पुलिस सुरक्षा के बीच ही उसे भी मौत के घाट उतार दिया। गुलाब की हत्या में गवाह बने उसके भतीजे लाला उर्फ विपिन की भी वर्ष 2014 में बुलंदशहर में यमुनापुरम कालोनी के निकट हत्या कर दी थी। हत्याओं की फेहरिस्त में एक मात्र गवाह लाला के पिता जयपाल ही जिंदा बचे हैं। 7 जून 2014 को भाजपा नेता विजय पंडित की दादरी में हुई हत्या में भी बलराज गैंग का नाम सामने आया था।
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अंधाधुंध फायरिंग करता था बलराज
बलराज गैंग के साथ और अपने शिकार को ललकार कर हत्या करता था। यही नहीं बलराज गैंग हत्या के दौरान अपने शिकार पर अंधाधुंध फायरिंग करता था। जिसके चलते हर कोई उसके सामने आने से कतरा था।
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गवाह होते थे निशाने पर
मुख्य रुप से बलराज कटार की हत्या करने के बाद अपने गवाहों को खत्म करने की कोशिश करता था। जिसमें वह अधिकतर कामयाब भी रहा। उसने कटार के भाई गुलाब और गुलाब के भतीजे विपिन की हत्या इसी कारण की थी।
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दर्जनों मुकदमे थे दर्ज
पुलिस की मानें तो जिले भर में ही बलराज भाटी पर हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और अन्य धाराओं में मामले दर्ज थे। एसएसपी मुनीराज जी ने बताया कि बलराज पर कोतवाली देहात, शिकारपुर, सिकंदराबाद सहित अन्य थानों में भी कई मामले दर्ज थे। दूसरे जिलों में भी उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।