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स्वास्थ्य विभाग में जनरेटर भी बना घोटाला में मददगार

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मरीजों को भोजन देने में भी हुआ खेल
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गाजियाबाद। स्वास्थ्य विभाग में हुआ घोटाला आक्सीजन सिलेंडर खरीद तक ही सीमित नहीं है। जनरेटर के लिए डीजल खरीद, मरीजों को भोजन मुहैया कराने से लेकर पोलियो अभियान के नाम पर भी भारी खेल किया गया। शासन को मुहैया कराई गई विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट पूरे विभाग की पोल खोल रही है। रिपोर्ट से पता चलता है कि विभाग में जहां मौका मिल रहा है वहां पर खेल हो रहा है। शहर में औसत 22 घंटे बिजली सप्लाई होती है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों पर जनरेट आठ से 10 घंटे चालू दिखाकर डीजल खरीद में सरकारी धन को ठिकाने लगाया गया। ऐसी ही कुछ पोलियो व आरआई अभियान के नाम पर किया गया।
महिला अस्पताल में दो लाख 44 हजार से अधिक की डीजल खरीदा गया, लेकिन ऑडिटर के सामने लॉक बुक प्रस्तुत नहीं कर पाए। एमएमजी में 45 लाख 39 हजार 90 रुपये मरीजों को खाना देने पर भुगतान के तौर पर अदा किया गया। ऑडिट के समय अस्पताल 44 लाख 17 हजार 677 रुपये का बिल दे पाया। एक लाख 14 हजार से अधिक की धनराशि कैसे खर्च हुई इसका हिसाब-किताब नहीं दे पाए। ऑडिटर ने सबसे बड़ा सवाल टीकाकरण अभियान पर उठाया है। उसने लिखा है कि विभाग में आरआई और पोलियो अभियान के नाम पर बड़ी संख्या में बिना टेंडर के गाड़ियां ली जाती हैं। उनका पेमेंट भी बिना किसी स्वीकृति के कर दिया गया, लेकिन हैरत की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं था। जिससे यह पता चल सके कि गाड़ी किस रूट पर अभियान के दौरान गई। बताया जा रहा है कि आधी गाड़ियां सिर्फ कागजों में हायर की जाती है और उनका नाम पर किया गया भुगतान विभागीय अधिकारियों को झोली में जाता है।
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शासन ने भी माना, दाल में है काला
ऑडिट रिपोर्ट आने पर शासन ने भी माना है कि गाजियाबाद में स्वास्थ्य विभाग की खरीद में भारी खेल हुआ है, जिसकी विस्तृत जांच जरूरी है। इस संबंध में मंडलायुक्त से लेकर जिलाधिकारी को भी रिपोर्ट भेजी है। साथ ही सीएमओ से स्पष्ट कर दिया है कि प्रकरण के लिए आप, आपके अधीनस्थ और कर्मचारी व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार होंगे, जिन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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