फ्लैट नंबर 505 में 10 मिनट में हो गया ऑपरेशन
गाजियाबाद/नई दिल्ली। अपराध शाखा रात ने सोमवार रात 11:40 बजे नितिन को सीमापुरी इलाके से दबोच लिया। पुलिस को पूरा अंदाजा था कि बदमाशों की ओर से फायरिंग हो सकती है। इसीलिए कमांडो को भी ऑपरेशन का हिस्सा बनाया गया। रात 12.40 पर ऑपरेशन शुरू हुआ और ठीक 10 मिनट बाद 12.50 बजे मासूम विहान को सकुशल मुक्त करा लिया गया। दोनों ओर से आठ गोलियां चलीं। पुलिस की ओर से एके-47 और ग्लोक पिस्टल का इस्तेमाल हुआ। वहीं बदमाशों ने पुलिस टीम पर 7.65 एमएम की पिस्टल से फायरिंग की।
अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि नितिन को काबू करते ही अधिकारियों ने फौरन 16 लोगों की टीम बना दी। ऑपरेशन खत्म होने के बाद डीसीपी डॉ. रामगोपाल नायक ने विहान को गोद में उठा लिया। उसका मेडिकल कराकर रात को ही परिवार को सौंप दिया गया। जांच में पुलिस को पता चला कि हाल में परिवार ने एक प्रापर्टी को डील किया था, जिसके करीब 57 लाख रुपये उनके पास आए थे। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस व ह्यूमन इंटेलिजेंस की मदद लेकर विहान को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ा लिया।
ऐसे अंजाम तक पहुंचा ऑपरेशन
जांच में पता चला कि गोकुलपुरी इलाके के कुछ लोगों ने अगवा हुए मासूम को रखा हुआ है। चार दिन नजर रखने पर सोमवार रात करीब 11.40 बजे खाना ले जाते हुए एक बदमाश नितिन (28) को दबोच लिया गया। उसने बताया कि मासूम को शालीमार सिटी के फ्लैट में पांचवीं मंजिल पर रखा गया है। वहां रवि (24) और पंकज उर्फ सिंह साहब (21) नामक बदमाशों के पास हथियार भी हैं। नितिन को लेकर रात करीब 12:40 बजे संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार, डीसीपी डॉ. राम गोपाल नायक, जॉय टिर्की समेत कई एसीपी मौके पर पहुंचे और अपराध शाखा के कमांडो को भी बुलाया। नितिन ने दरवाजा खटखटाया, शक होने पर पंकज ने दरवाजा बंद कर दिया। बदमाश अंदर से विहान को गोली मारने की धमकी दी। कमांडो व इंस्पेक्टर विनय त्यागी और एसीपी राजेश कुमार ने दरवाजा तोड़ दिया। बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक गोली रवि की गर्दन में और पंकज की जांघ में लगी। विहान अंदर वाले कमरे में बेड के नीचे डरा, सहमा छुपा था। घायल रवि व पंकज को जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां रवि की मौत हो गई।
पहले भी अगवा करने की हुई थी कोशिश
आरोपी बदमाशों ने पहले भी तीन बार विहान गुप्ता के अपहरण की कोशिश की थी, मगर मंसूबों में कामयाब नहीं हो पा रहे थे। कभी स्कूल बस टाइम से नहीं पहुंचती थी तो कभी उन्हें देरी हो जाती थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्कूल बस से विहान की सात वर्षीय बहन भी थी, लेकिन वह उसका अपहरण नहीं करना चाहते थे। उनको लगता था कि वह बड़ी है और काबू करने में दिक्कत आएगी। तीनों आरोपी साहिबाबाद के पूरे इलाके से वाकिफ थे। नितिन का इलाके में ढाबा है। ढाबे के लिए वह पीड़ित परिवार की दुकान पर डिस्पोजल सामान लेने आता था।
बदमाशों से मिलने की जिद कर रहा था विहान
बदमाशों ने पीड़ित बच्चे से दोस्ताना व्यवहार बना लिया था कि पकड़े जाने के बाद वह उनसे मिलने की जिद कर रहा था। खुश रखने के लिए अपहरणकर्ता उसे चॉकलेट, फास्ट फूड व पंसद का खाना देते थे। इसी कारण पड़ोसियों को अपहरण की भनक नहीं लगी थी। बरामदगी के बाद पुलिस ने जब बच्चे को बदमाशों की फोटो दिखाई तो वह उनसे मिलने की जिद करने लगा।
भर आया परिजनों का गला
दिल्ली पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर जब पीड़ित परिवार को सौंपा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। परिजनों का कहना था कि पुलिस ने उनकी जिंदगी लौटा दी है। बेटे को सीने से लगाते ही उसके माता-पिता की आंखों में आंसू आ गए।
फ्लैट से यह सामान हुआ बरामद
मुठभेड़ के बाद पुलिस को बदमाशों के पास से दो 7.65 एमएम की पिस्टल, दो मैगजीन, चार कारतूस, चार खोखे, दो गोली के लेड के अलावा बड़ी संख्या में गर्भनिरोधक वस्तु और महिलाओं के अंडर गारमेंट बरामद हुए। आरोपी नितिन ने बताया कि उसने फ्लैट करीब 11 माह पूर्व एक महिला से 11 हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर लिया था। बदमाश अपनी प्रेमिकाओं को लेकर यहां आते थे।
अन्य आरोपियों की तलाश
फ्लैट नंबर-505 में एक महिला भी लगातार आती थी। इसके अलावा दो-तीन लोग आते थे। महिला कौन है और वह कहां से फ्लैट पर आती थी, पुलिस इसका पता लगाने का प्रयास कर रही है। माना जा रहा है कि नितिन ने अपनी गर्लफ्रेंड को भी बच्चे को अगवा करने की साजिश में शामिल किया हुआ था। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।