पीड़ित राजेश के मुताबिक दोनों आरोपियों ने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव से उनके अच्छे संबंध हैं। उन्हीं के माध्यम से वह अपने बेटों की नौकरी लगवा रहे हैं। राजेश का कहना है कि बेटे व भाई की नौकरी लगवाने की एवज में आरोपियों ने उनसे 30 लाख रुपये की मांग की। उन्होंने इतनी मोटी रकम देने में असमर्थता जाहिर की तो सौदा 20 लाख रुपये में तय हो गया।
फॉर्म भराया, फर्जी मेडिकल परीक्षण भी कराया
सुरेश का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2018 में दोनों आरोपियों को पैसे दे दिए। इसके बाद उक्त दोनों ने उनके बेटे व भाई का दिल्ली के एक अस्पताल में मेडिकल परीक्षण भी कराया। आरोपियों ने दो महीनों में नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया था। साथ ही, इस संबंध में प्रमुख सचिव से बात होने का हवाला भी दिया था। काफी समय बीतने के बाद भी नौकरी न लगने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ। आरोप है कि रकम वापस मांगने पर उक्त लोगों ने हमला करा दिया। थाने में शिकायत करने पर पुलिस ने कार्रवाई करने की बजाय उल्टे उन्हें भगा दिया। पीड़ित सुरेश का कहना है कि पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने पर उन्होंने सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
रकम देते समय बना ली गई थी वीडियो
सुरेश चंद ने बताया कि जब उन्होंने बेटे और भाई की रेलवे में नौकरी लगवाने के लिए उक्त लोगों को रकम दी थी तो उनकी वीडियो बना ली थी। उनका कहना है कि सुबूत के तौर पर वीडियो देने के बाद भी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।