गाजियाबाद
नगर निगम के चीफ इंजीनियर ने फोर जी कंपनी (जियो इंफोटेल) को फायदा पहुंचाने
के लिए रोड कटिंग की पुरानी एनओसी को फिर से रिन्युअल कर दिया।
निर्धारित
अवधि में काम पूरा न हो पाने की कंपनी की दलील पर चीफ इंजीनियर से एनओसी की
अवधि अब 10 सितंबर तक रोड कटिंग की अनुमति दे दी।
निगम पार्षदों ने चीफ
इंजीनियर पर मोबाइल कंपनी को करोड़ों रुपये का फायदा और निगम को घाटा
पहुंचाने का आरोप लगाकर मंडलायुक्त से शिकायत की है। उन्होंने इसे वित्तीय
घोटाला बताते हुए विजिलेंस जांच की मांग की है।
शुक्रवार
को निगम मुख्यालय में एक प्रेसवार्ता के दौरान निगम पार्षद राजेंद्र
त्यागी ने आरोप लगाया कि चीफ इंजीनियर आरके मित्तल ने वर्ष 2012 और 2014
में दी गई एनओसी को रिन्युअल करने से पहले किसी अधिनस्थ इंजीनियर से
सत्यापन भी नहीं कराया कि कंपनी का काम पूरा न होने का दावा झूठा है या
सच्चा।
उनका कहना है कि एक वित्तीय वर्ष में दी गई एनओसी का काम निर्धारित
अवधि में पूरा होना चाहिए, ताकि अकाउंट में भी उसे उसी वर्ष शामिल कर लिया
जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में नगर आयुक्त अब्दुल समद इस बात पर नाराजगी
जता चुके हैं कि रोड कटिंग का सभी जोन का काम एक ही इंजीनियर को दे रखा है।
उन्होंने इसके लिए सभी जोन के अधिशासी अभियंताओं को जिम्मेदारी दी थी।
बावजूद इसके चीफ इंजीनियर ने एनओसी देने से पहले न किसी से रिपोर्ट मांगी
और न सत्यापन कराया।
पार्षद राजेंद्र
त्यागी ने कहा कि मोबाइल कंपनी, गैस कंपनी को रोड कटिंग की एनओसी देने से
पहले 30 रुपये प्रति रनिंग मीटर इंजीनियरों के स्तर पर रिश्वत ली जा रही
है।