आठ महीने में जिले में 29845 लोगों को आवारा जानवरों के काटने पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई है। इनमें अधिकांश लोग कुत्ते के काटने से जख्मी होकर एआरवी लगवाने पहुंच रहे हैं। एमएमजी अस्पताल के फार्मासिस्ट नागेंद्र ने बताया कि रोजाना चार से पांच लोग पालतू कुत्तों के काटने पर एआरवी लगवाने के लिए आते हैं, जबकि अन्य लोग आवारा कुत्ते या बंदरों के हमलों से घायल होकर पहुंचते हैं।
आठ महीने में 22 बच्चों को कुत्तों ने काटा
अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया जनवरी से अब तक 22 बच्चों को कुत्तों के काटने पर गंभीर हालत में इमरजेंसी में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी। सीएमएस ने बताया कि छह महीने पहले सिद्धार्थ विहार से आई दो वर्ष की एक बच्ची के चेहरे को कुत्तों ने बुरी तरह से नोच डाला था। बच्ची के चेहरे का ऑपरेशन करना पड़ा था।
पांच क्षेत्रों में सबसे अधिक आवारा कुत्तों का आतंक
एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में एआरवी लगवाने के लिए आने वाले घायलों में सबसे अधिक विजयनगर, सुदामापुरी, लाल कुआं, अर्थला, नंदग्राम, राहुल विहार क्षेत्र से आते हैं। वहीं, संयुक्त अस्पताल में भट्ठा नंबर पांच, गुलधर, आकाश नगर क्षेत्र से घायल आते हैं जबकि डासना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर खिचरा, पिपलेड़ा, मसूरी, डासना और रफीकाबाद क्षेत्र से घायल एआरवी लगवाने के लिए पहुंचते हैं।
एआरवी लगाने के लिए पांच स्वास्थ्य कर्मियों टीम
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि ओपीडी में प्रतिदिन 150-200 लोग एआरवी लगवाने आते हैं। इसके लिए अलग से एंटी रेबीज क्लीनिक खोला गया है। पांच स्वास्थ्यकर्मी एआरवी लगाते हैं। सीएमएस ने बताया कि खाना व पानी नहीं मिलने से कुत्ते व बंदर अधिक आक्रामक हो रहे हैं। किसी के हाथ में खाने का कोई सामान देखते ही हमला कर देते हैं।
24 घंटे एआरवी लगवाने की सुविधा
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि इस समय सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एआरवी उपलब्ध है। 24 घंटे टीकाकरण की सुविधा है। सीएमओ ने बताया कि सभी अस्पतालों में दो बजे के बाद इमरजेंसी में एआरवी लगाने की व्यवस्था है।
जानवरों के काटने पर एंटी रेबीज वैक्सीन की खुराक
-काटने के दो से चार घंटे के भीतर पहला खुराक
-दूसरा खुराक तीसरे दिन
-तीसरा खुराक सातवें दिन
-चौथा खुराक 14 दिन बाद
-पांचवीं खुराक 30 दिन बाद