सिटी से निकलने वाले वेस्ट को बेकार नहीं फेंका जाएगा। इस कचरे से मीथेन गैस बनाई जाएगी। प्रदेश के नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में पीपीपी मॉडल पर प्लांट लगाए जाएंगे।
इस गैस को खाना पकाने, रोशनी और जनरेटर चलाने में इस्तेमाल किया जा सकेगा। एक प्राइवेट कंपनी ने लखनऊ में नगर विकास विभाग के अधिकारियों के सामने प्लांट का प्रेजेंटेशन दिया है। अब शासन ने नगर निगम और पालिकाओं से उपयोगिता के मुताबिक विचार करने को कहा है।
शासन ने छोटी नगर पालिकाओं और निगम के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे प्लांट लगाने का सुझाव दिया है। इन प्लांट में पशु डेयरियों, सब्जी मंडियों व अन्य जैविक अपशिष्ट के जरिए मीथेन गैस (बायो गैस) बनाई जाएगी।
प्राइवेट कंपनी ने लखनऊ में दिए गए प्रेजेंटेशन में बताया कि इस गैस को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सीधे पाइप लाइन के जरिये या सिलेंडर में भरकर खाना बनाने में इस्तेमाल की जा सकती है।
गैस के बाद अपशिष्ट को खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेेगा। स्थानीय निकाय निदेशक पीके सिंह ने नगर निगमों और पालिकाओं को योजना पर की गई कार्रवाई देने को भी कहा है।
अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा का कहना है कि बायो गैस प्लांट की उपयोगिता देखने के बाद निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले निगम ने कचर से ऑयल और प्लास्टिक ईंट बनाने की तकनीक को लागू करने के लिए प्लानिंग की है।