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Delhi: जेन-जी चले मंदिर...युवाओं में शुरु हुआ आस्था का ट्रेंड, धार्मिक स्थलों की ओर कर रहें रुख

Tue, 06 Jan 2026 06:10 AM IST
Digvijay Singh काजल कुमारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नववर्ष 2026 को एक सप्ताह बीत चुका है। इस बीच देश के युवाओं, खासकर जेन-जी के रुझान में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक क्लब, पार्टी, डीजे नाइट, रेस्टोरेंट और सोशल मीडिया के डिजिटल दिखावे से पहचानी जाने वाली यह पीढ़ी आस्था और अध्यात्म की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।
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नए साल पर मंदिरों में भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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नववर्ष 2026 को एक सप्ताह बीत चुका है। इस बीच देश के युवाओं, खासकर जेन-जी के रुझान में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक क्लब, पार्टी, डीजे नाइट, रेस्टोरेंट और सोशल मीडिया के डिजिटल दिखावे से पहचानी जाने वाली यह पीढ़ी आस्था और अध्यात्म की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। नववर्ष की शुरुआत युवाओं ने शोर-शराबे और मनोरंजन से दूर रहकर काशी, अयोध्या और मथुरा जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों में दर्शन-पूजन के साथ की है।

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रेलवे और यात्रा से जुड़े आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं, जहां दिसंबर के अंतिम सप्ताह से जनवरी के पहले दिनों तक धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों में युवाओं की हिस्सेदारी अधिक रही है। रेलवे प्रवक्ता के अनुसार मथुरा जंक्शन के लिए 1 लाख, 95 हजार 678, वाराणसी के लिए 73 हजार 652 और अयोध्या के लिए 51 हजार, आरक्षित और अनारक्षित टिकटें हुई है।

दिल्ली की बात करें तो राजधानी के प्रमुख मंदिरों में भी नववर्ष के पहले सप्ताह में युवाओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर, करोल बाग का झंडेवाला मंदिर, कालकाजी मंदिर, बिरला मंदिर, इस्कॉन मंदिर और हौज खास स्थित जगन्नाथ मंदिर में बड़ी संख्या में युवा दर्शन करते नजर आए। खास बात यह रही कि अधिकतर युवा अकेले या अपने दोस्तों के साथ पहुंचे और पूजा-पाठ, ध्यान व शांति के लिए समय बिताते दिखे।
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कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर के पुजारी राजेश शास्त्री ने बताया कि युवाओं में यह बदलाव केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि सोच में आए परिवर्तन का संकेत है। तेज रफ्तार जिंदगी, मानसिक तनाव और डिजिटल थकान के बीच जेन-जी अब सुकून, आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की तलाश में अध्यात्म की ओर रुख कर रही है।
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विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव समाज के लिए भी एक शुभ संकेत है, जहां युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कृति और आस्था से दोबारा जुड़ने की कोशिश कर रही है।

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