दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ तक प्रस्तावित रैपिड रेल कॉरिडोर के डिपो और एक स्टेशन के लिए मधुबन-बापूधाम योजना में 30 हेक्टेयर जमीन देने से जीडीए ने कारण सहित इनकार कर दिया है। ऐसे में रैपिड रेल डिपो के लिए जमीन का मामला फिर फंस गया है।
शासन ने एनसीआरटीसी की ओर से जमीन की मांग को लेकर शासन को भेजे गए पत्र के बाद बृहस्पतिवार को बैठक बुलाई थी। इसमें जीडीए ने जमीन न दे पाने में असमर्थता के साथ अपना पक्ष भी रखा। जीडीए ने मधुबन-बापूधाम योजना में एक साथ दिल्ली-मेरठ हाईवे से सटी 30 हेक्टेयर जमीन न होने का हवाला दिया।
इसके अलावा अस्पताल, स्कूल, पेट्रोल पंप, सीएनजी पंपिंग स्टेशन और अन्य यूटिलिटी के लिए योजना में जमीन निर्धारित है। वहीं, 22 हेक्टेयर जमीन किसानों को मुआवजे के साथ उन्हें भूखंड देने के लिए रखी गई है। जीडीए की ओर से सीएटीपी ने शासन में पक्ष रखा।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक मधुबन-बापूधाम योजना में किसानों को मुआवजा देने के लिए जीडीए ने 800 करोड़ बैंक लोन लिया है। लोन लेने के लिए योजना में ग्रुप हाउसिंग और व्यावसायिक करीब 50 हेक्टेयर जमीन को बैंक लोन देने के लिए बंधक रखा गया है। ऐसे में तकनीकी कारणों से भी जीडीए का एनसीआरटीसी को जमीन देना संभव नहीं है।
ऐसे में मधुबन बापूधाम योजना में निराशा हाथ लगने पर एनसीआरटीसी को फिर से दुहाई के पहले मॉडल पर तेजी से काम करना होगा। बता दें कि रैपिड रेल कॉरिडोर का एनसीआरटीसी ने दुहाई में डिपो प्रस्तावित किया था। जुलाई 2019 में ही दुहाई में रैपिड रेल के डिपो के लिए तीन गांवों की 67.0523 हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की गई थी।
इसमें भिक्कनपुर गांव में 37.87 हेक्टेयर, बसंतपुर सैंथली गांव में 25.50 हेक्टेयर और दुहाई में 3.6725 हेक्टेयर जमीन की अधिसूचना हुई थी। डिपो के लिए जमीन के बाबत एनसीआरटीसी की किसानों से कई दौर की वार्ता हो चुकी है। एनसीआरटीसी को किसानों से सीधे जमीन खरीदनी है, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। किसानों का कहना था कि खेती ही उनकी आय का मुख्य स्त्रोत है।
रैपिड रेल डिपो के लिए कृषि भूमि देने पर वह बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने मांग रखी थी कि उनके परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी भी दी जाए। इस पर एनसीआरटीसी तैयार नहीं है। अब दूसरा विकल्प लगभग बंद होने से एनसीआरटीसी को पहले विकल्प पर ही आगे बढ़ना होगा।
मार्च 2023 तक शुरू होना है पहला सेक्शन, बढ़ी मुसीबत
एनसीआरटीसी को रैपिड रेल कॉरिडोर में 17 किमी लंबे साहिबाबाद से दुहाई स्टेशन तक का सेक्शन मार्च 2023 तक शुरू करना है। लेकिन डिपो की जमीन संबंधी मामला फंसा हुआ है। मार्च 2023 को पहला सेक्शन शुरू करने के लिए एनसीआरटीसी को एक साल पहले मार्च 2022 तक रेलवे का सेफ्टी ट्रायल रन के लिए आवेदन करना होगा। ऐसे में जमीन नहीं मिलने और निर्माण संबंधी देरी होने से एनसीआरटीसी की परेशानी बढ़ सकती है।
सात स्टेशन के लिए अभी नहीं मिली है जमीन
एनसीआरटीसी को गाजियाबाद में प्रस्तावित सात स्टेशनों के लिए करीब 2.50 लाख वर्ग मीटर जमीन की जरूरत है। मंडलायुक्त की बैठक में एनसीआरटीसी के अधिकारियों ने स्टेशनवार कितनी जरूरत की आवश्यकता है, जिसका पूरा ब्यौरा रखा था। एनसीआरटीसी को दुहाई में 32108 वर्ग मीटर, गुलधर में 27064 वर्ग मीटर, गाजियाबाद में 27719, साहिबाबाद में 34921 वर्ग मीटर, मुरादनगर में 38214 वर्ग मीटर, मोदीनगर साउथ में 45087 वर्ग मीटर और मोदीनगर नॉर्थ में 48887 वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता है।
मधुबन बापूधाम योजना में जीडीए के पास डिपो के लिए एक साथ 30 हेक्टेयर जमीन नहीं है। योजना में स्कूल, अस्पताल, पेट्रोल पंप आदि यूटिलिटी के लिए जमीन छोड़ी जानी तय है। ऐसे में योजना में रैपिड डिपो के लिए जमीन न होने संबंधी प्राधिकरण का पक्ष शासन के समक्ष रखा गया है।
- आशीष शिवपुरी, सीएटीपी, जीडीए