गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए), आवास विकास परिषद समेत अन्य सरकारी विभाग अब जमीन का 100 फीसदी कब्जा लेने के बाद ही स्कीम लांच कर सकेंगे। प्रदेश सरकार ने जमीन मिलने के हवा-हवाई अनुमानों के आधार पर स्कीम लांच करने पर रोक लगा दी है।
15 जनवरी को सचिव (आवास) पनधारी यादव द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक अब फाइलों की बजाय स्कीम की प्रस्तावित जमीन पर सड़कों, अप्रोच रोड, चहारदीवारी आदि का निर्माण होने के बाद ही कब्जा पूरा माना जाएगा।
शासनादेश में रजिस्ट्रेशन के बाद तय डिजाइन न बदलने, रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन ही लेने और निर्माण की प्रगति के अनुरूप किश्तें लिए जाने के भी प्रावधान हैं।
जीडीए और आवास विकास की कई योजनाएं जमीन न मिलने के कारण पंजीकरण-आवंटन होने के वर्षों बाद भी पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतर पाईं हैं। पूरे प्रदेश में कमोबेश यही स्थिति है।
इससे स्कीम के आवेदकों को पजेशन के लिए वर्षों का इंतजार करना पड़ता है। आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियां भी उठानी पड़ती हैं। कई परेशान आवेदकों ने सरकारी विभागों के खिलाफ केस भी दायर कर रखे हैं।
नए प्रावधानों से अब इन संस्थानों के आवंटियों को घर के लिए सालों साल इंतजार नहीं करना होगा। आर्थिक रूप से भी राहत मिलेगी।
जीडीए वीसी विजय यादव के मुताबिक समय पर योजनाएं पूरी न होने का खामियाजा आवेदकों को उठाना पड़ता है। शासनादेश के प्रावधानों से योजनाओं का समयबद्ध निर्माण और कब्जा मिलना सुनिश्चित होगा। लोगों के बीच प्राधिकरणों की छवि भी सुधरेगी। जीडीए शासनादेश के मुताबिक भावी योजनाएं लांच करेगा।
जितना निर्माण, उतनी किश्त
नए प्रावधानों में आवंटियों को आर्थिक रूप से राहत मिलेगी। अब स्कीम के विकास के अनुसार आवंटियों से किश्तें ली जाएंगी। रजिस्ट्रेशन बुक में ही किश्तों का निर्धारण कर दिया जाएगा।
निर्माण इस तरह किया जाएगा कि अंतिम किश्त के भुगतान के 30 कार्य दिवस के भीतर आवंटी को कब्जा दे दिया जाए। ऐसा न होने पर आवंटी को नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई करनी होगी।
यह हैं अन्य खास प्रावधान
रजिस्ट्रेशन के बाद स्कीम के डिजाइन में नहीं हो सकेगा कोई बदलाव, स्कीम के फ्लैट-प्लाट की कीमतों में किसी भी संभावित बदलाव की जानकारी रजिस्ट्रेशन की बुकलेट में स्पष्ट रूप से दी जाएगी।
स्कीम का रजिस्ट्रेशन प्राधिकरण-परिषद की वेबसाइट से ऑनलाइन होंगे। इसे आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, आवास बंधु पर भी अपलोड किया जाएगा।