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लड़कों के शारीरिक संबंधों का यह सच डराने वाला है

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सेक्स या शारीरिक संबंध बनाना बेहद निजी फैसला होता है लेकिन, ऐसे पुरुष जो पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं उनके लिए हमारे परंपरागत समाज में सामान्य जीवन गुजारना बेहद मुश्किल है।
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ऐसे में पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध रखने वाले समुदाय -एमएसएम- (Men who have sex with men) के लिए अपनी पेरशानी व्यक्त करना और उनका समाधान पाना बड़ी चुनौती है।

ऐसे लोगों की मदद करने के लिए सितंबर 2013 में 'सहाय' (SAHAAY) नाम से एक हेल्प लाइन की शुरुआत की गई थी।

नौ महीने के  दौरान इस हेल्पलाइन नंबर पर एक लाख से ज्यादा ट्रांसजेंडर्स और ऐसे पुरुषों ने फोन किया जिनके दूसरे पुरुषों से शारीरिक संबंध थे।

नौ महीने में एक लाख कॉल कर बताई अपनी समस्या

चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिन एक लाख लोगों ने सहाय की हेल्पलाइन पर कॉल किया उनमें से ज्यादातर विवाहित थे और उनके बच्चे भी थे।

सहाय नामक हेल्पलाइन की शुरुआत दिल्ली,छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के सहयोग से एक अंतरराष्ट्रीय 'एनजीओ फैमिली हेल्‍थ इंटरनेशनल 360' ने की थी। इस हेल्पलाइन नंबर को सितंबर 2013 से मई 2014 के बीच नौ महीने तक चलाया गया।

सहाय प्रोजेक्ट के डायरेक्टर अशोक अग्रवाल के मुताबिक नौ महीनों के दौरान लगभग एक लाख कॉल आए जिसमें 39800 लोगों ने अपनी समस्याएं बताईं।

एमएसएम पुरुषों को पुलिस भी करती है प्रताड़ित

इस प्रोजेक्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। सहाय में कॉल करने वाले 70 प्रतिशत एमएसएम श्रेणी के लोगों ने पिछले एक साल से अपना एचआईवी टेस्ट नहीं करवाया था।

इनमें से 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने डर के चलते अपना टेस्ट नहीं करवाया जबकि बाकि लोगों को इस टेस्ट के बारे में पता ही नहीं था।

अशोक अग्रवाल ने बताया कि ऐसे पुरुष जो पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध रखते हैं समाज के साथ पुलिस भी उन्हें काफी प्रताड़ित करती है।

यही कारण है कि ऐसे पुरुष अगर विवाहित हैं या अपने परिवार के साथ रहते हैं, अपनी समस्याओं के बारे में खुल कर किसी को नहीं बताते।
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एमएसएम पुरुषों की समस्या भी सुनी जाए

एमएसएम श्रेणी के पुरुषों में एड्स को फैलने से रोकने के लिए जरूरी है कि उनकी समस्याओं को सुना जाए और उन्हें समाधान बताया जाए।

सहाय हेल्पलाइन में कॉल करने वाले 93.10 प्रतिशत लोगों ने एचआईवी,एड्स सहित ऐसे ही संक्रामक रोगों के बारे में जानकारी मांगी।

2011 में एचआईवी प्रभावित लोगों की संख्या में 0.27%  की कमी आई है। लेकिन एक बहुत बड़ा तबका ऐसा है जिसमें पुरुष आपस में संबंध बनाते हैं।

अशोक का कहना है कि एमएसएम वर्ग में भी एड्स और इस तरह के संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना होती है जिसके समाधान की जरूरत है।

(साभार:Mail today)
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