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दिल्ली के 3 सेनेटरी लैंडफिल में अवधि खत्म होने के बाद भी डाला जा रहा कूड़ा

Fri, 01 Sep 2017 07:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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ghazipur landfill site
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राजधानी में कूड़े के प्रबंधन और कूड़ा डालने का कोई इंतजाम नहीं है। इसके चलते से गाजीपुर, भलस्वा और ओखला सेनेटरी लैंडफिल में कूड़ा डालने की अवधि खत्म होने के बावजूद उनमें कूड़ा डाला जा रहा है। 
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उनमें कूड़ा डालने की अवधि वर्ष 10 वर्ष पूर्व यानि 2007 में खत्म हो चुकी है। लिहाजा आज इन तीनों सेनेटरी लैंडफिल में कूड़े के ढेर पहाड़ों से भी ऊंचे लग चुके है और उनमें गैस बनने की वजह से आग लगने की घटनाएं आम हो चुकी है। 

एकीकृत नगर निगम के जमाने में दिल्ली का कूड़ा डालने के लिए करीब दो से तीन दशक पहले गाजीपुर, भलस्वा और ओखला में सेनेटरी लैंडफिल बनाए गए थे। उस दौरान अनुमान लगाया गया था कि यह सेनेटरी लैंडफिल वर्ष 2008 तक कूड़े से पट जाएंगे। मगर यह तीनों सेनेटरी लैंडफिल तय अवधि से करीब पांच वर्ष पहले ही कूड़े से भर गए। 
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इसके बावजूद भी उनमें कूड़ा डाला गया। इतना ही नहीं, तीनों सेनेटरी लैंडफिल में कूड़ा डालने की अवधि समाप्त हुए करीब एक दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें कूड़े से निजात नहीं मिली है। उनमें अभी कूड़ा जा रहा है। 

अब तीनों सेनेटरी लैंडफिल की हालत यह हो चुकी है उनके बारे में काफी दूर से ही पता चला जाता है, क्योंकि उनमें कूड़े के पहाड़ों से भी बड़े ढेर लग चुके है। 

तीनों सेनेटरी लैंडफिल के कूड़े के ढेरों में करीब-करीब रोजाना आग लगने की घटनाएं होती है। दरअसल कूड़े में मिथेन गैस पैदा होती है और उसमें स्वयं ही आग लग जाती है। इस समस्या से परेशान भलस्वा के आसपास के लोगों ने गत वर्ष सैनेटरी लैंडफिल बंद करने का आंदोलन शुरू किया था। 

कूड़ा निस्तारण के लिए तय किए गए थे 4 नए स्थान

ghazipur landfill site
इसी बीच नगर निगम ने कूड़े डालने के लिए नए चार स्थान तय किए, लेकिन कानूनी अडचनों एवं स्थानीय लोगों के विरोध के चलते वह एक ही जगह नरेला-बवाना में सेनेटरी लैंडफिल बना सकी। नगर निगम ने जैतपुर, भाटी माइंस और घुमनहेड़ा में भी सेनेटरी लैंडफिल बनाने का निर्णय लिया था और इन स्थानों पर दिल्ली सरकार से उसे जगह भी मिल गई थी। 

नगर निगम ने करीब एक दशक अपने सभी सेनेटरी लैंडफिलों पर कूड़े से बिजली बनाने की योजना अपनाने का निर्णय लिया था, लेकिन उसकी यह योजना शुरुआत दौर से आगे नहीं बढ़ सकी। दरअसल सेनेटरी लैंडफिलों पर गीला एवं सूखा कूड़ा अलग-अलग करके नहीं भेजा जाता है। 

इसके अलावा कूड़े में मलबा भी मिला होता है। इस तरह 10 प्रतिशत कूड़ा भी बिजली बनाने में खर्च नहीं हो पा रहा है। इसी तरह कूड़े से गाद बनाने की योजना भी फ्लाप हो चुके है। इसका मुख्य कारण भी गीला व सूखा कूड़ा मिला होना है। 
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प्रतिदिन कूड़ा पैदा होने का ब्यौरा 

ghazipur landfill site
वर्ष            कूड़ा-मिट्रिक टन 
2007                      6000 
2009                      9000 
2017                      12000 
2021                      17000 

सक्रिय कूड़ा निष्पादन स्थल (सेनेटरी लैंडफिल) 
नाम        भौगोलिक स्थिति    क्षेत्रफल (हेक्टयर में) 
भलस्वा        उत्तरी दिल्ली        19.2 
गाजीपुर        पूर्वी दिल्ली        28.0 
ओखला        दक्षिण दिल्ली        12.8 
नरेला-बवाना        उत्तरी दिल्ली        60.0 
 
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