सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उजीना को स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया अतिसंवेदनशील क्षेत्र घोषित किया हुआ है।
क्योंकि इस क्षेत्र में करीब 6 वर्ष पहले मलेरिया भयंकर रुप से फैला था और उसमें 250 लोगों की मौत हुई थी।
इस बार विभाग ने विशेष योजना के तहत इन गांवो के जोहड़ों में गंबूजिया मछली छोड़ने की योजना बनाई है। जो मच्छरों के लारवे को खाकर उन्हें पनपने से रोकेगी। विभाग ने इसके लिए नूंह खंड के 41 जोहड़ों को चिह्नित किया है। इनमें अधिकतर जोहड़ उजीना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन आते हैं।
क्योंकि यह गांव गुड़गांव केनाल व उजीना ड्रेन से जुडे हुए हैं तथा इन गांवों में मछली पालन के लिए काफी संख्या में तालाब बने हुए हैं। जिससे यहां बरसात के समय चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देता है, जिसमें मच्छर पनपते हैं और उनके काटने से मलेरिया होता है।
वर्ष 2011 में यहां मलेरिया का प्रकोप हुआ था, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 248 लोगों की मौत मलेरिया के कारण हुई थी। जिन लोगों को पिछले वर्ष मलेरिया हो गया था, उनकी इस वर्ष स्लाइड बनाई जा रही है और पॉजिटिव केस मिलने पर पीवी के लिए 14 दिन तथा पीएफ के लिए 3 दिन दवा खाना अनिवार्य है।
नूंह के एसएमओ डॉ. गोविंद शरण का कहना है कि उजीना पीएचसी के गांवों में मलेरिया से पार पाने के लिए विभाग की तैयारियां पूरी हैं। मच्छर के लारवे को खत्म करने के लिए गंबूजियां मछली छोड़ने के लिए 41 तालाब चिह्नित किए हैं और मछली पालन विभाग को रिपोर्ट भेज दी है।