-आईओएए 2026 में 64 देशों के प्रतिभागियों के बीच जीता स्वर्ण, एक साल पहले रजत से शुरू हुआ था सफर
सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। आसमान में चमकते तारों को देखकर शुरू हुई जिज्ञासा अब दिल्ली के 12वीं कक्षा के छात्र सुमंत गुप्ता को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रही है। सुमंत ने 19वें अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी ओलंपियाड (आईओएए) 2026 में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। 25 सितंबर से 5 अक्तूबर तक वियतनाम के हनोई में आयोजित प्रतियोगिता में 64 देशों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
भारत की पांच सदस्यीय टीम का हिस्सा रहे सुमंत ने कठिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले वर्ष आईओएए 2025 में उन्होंने भारत के लिए रजत पदक जीता था। महज एक साल में रजत को स्वर्ण में बदलने का यह सफर उनकी मेहनत, निरंतर अभ्यास और बेहतर करने की जिद को दर्शाता है।
सुमंत की दिलचस्पी सिर्फ तारों को देखने तक सीमित नहीं रही। अंतरिक्ष, ब्रह्मांड और खगोल भौतिकी की जटिलताओं को समझने की उनकी जिज्ञासा ने उन्हें विज्ञान और गणित की गहराई में जाने के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी तैयारी को लगातार मजबूत किया।
रजत के बाद स्वर्ण :
आईओएए 2025 का रजत पदक सुमंत के लिए पड़ाव बना, मंजिल नहीं। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी को और धार दी और खगोल विज्ञान, खगोल भौतिकी तथा गणित पर पकड़ मजबूत की। नतीजा यह रहा कि अगले ही वर्ष उसी प्रतिष्ठित मंच पर उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल कर लिया।
सुमंत की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो विज्ञान और गणित को सिर्फ विषय नहीं, बल्कि अपने भविष्य की दिशा मानते हैं। उनकी कहानी बताती है कि जिज्ञासा, निरंतर मेहनत और सीखने की ललक मिलकर सपनों को वैश्विक मंच तक पहुंचा सकती है।