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कत्ल के पहले वैन में दोनों कैदियों से था दोस्ताना

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नीरज बवाना और गिरोह के सदस्यों ने नीतू दाबोदा गिरोह के सदस्य पारस व प्रदीप भोला की हत्या बहुत ही सोची समझी साजिश के तहत की है। हत्या इतनी बेरहमी से की गई कि पारस की तो एक आंख बाहर निकाल दी गई।
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नीरज व गैंग ने जेल वैन में पारस व प्रदीप से बहुत ही प्यार व दोस्ताना माहौल में बात की थी, ताकि दोनों को कोई संदेह न हो। ये भी कहा जा रहा है कि तिहाड़ प्रशासन इस दोहरे हत्याकांड के लिए सीधे रूप से जिम्मेदार है।

वैन में नीरज गिरोह के सात सदस्य थे, जबकि नीतू दाबोदा के सिर्फ दो। आरोपियों पूछताछ में बताया है कि हत्या का बदला लेने के लिए आरोपियों ने दोनों को मारा।
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कोर्ट से लौटते वक्त बदल गया माहौल और फिर..

पुलिस के मुताबिक जब लोगों को तिहाड़ जेल से रोहिणी कोर्ट लाया गया था तब नीरज व साथियों ने बहुत ही दोस्ताना तरीके से पारस व प्रदीप से बात की।

यही वजह थी कि रोहिणी कोर्ट से जेल ले जाते वक्त दोनों ने वैन में नीरज व साथियों के साथ जाने का विरोध नहीं किया था। रोहिणी पुलिस चौकी पुलिस के अनुसार रोहिणी कोर्ट से जाते हुए पारस और प्रदीप खुशी-खुशी जेल वैन में गए थे। यह नीरज बवाना गिरोह के सदस्यों की चाल थी।

पारस व प्रदीप के शवों का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने किया। मौलाना आजाद अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। पुलिस का कहना है कि करीब 10 दिन बाद रिपोर्ट आने की उम्मीद है।

पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव परिजनों को सौंप दिए गए। परिजन बुधवार शाम शवों को लेकर चले गए थे। पारस पानीपत और प्रदीप कैर, जाफरपुरकलां का रहने वाला था।
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