फर्जी कंपनियां बनाकर खोलते थे खाते
विभिन्न बैंकों को अपने जाल में फंसाने के लिए आरोपी फर्जी कंपनियां बनाते थे। इसके बाद आरोपी फर्जी तरीके से सैलरी के नाम पर कुछ रकम बैंक में कंपनी के नाम से ट्रांसफर करते थे। कुछ ही माह बाद बैंक सैलरी अकाउंट देखकर उस पर प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन ऑफर कर दिया करता था। मौका मिलते ही आरोपी बैंक से लोन ले लिया करते थे।
इन लोगों ने ज्यादातर मामलों में फर्जी कंपनियां बनाकर ठगी की। बाकी कई मामलों में खुद को सरकारी अधिकारी बताकर भी इन लोगों ने बैंकों को नुकसान पहुंचाया। तीनों ही आरोपी विनय अग्रवाल, कुलदीप सिंह और सुनील कुमार किसी न किसी रूप से बैंकों में नौकरी कर चुके थे। उनको बैंकों की लोन प्रक्रिया की अच्छी तरह जानकारी थी। फर्जी कंपनियां बनाने के लिए पहले फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार कर कंपनी का रजिस्ट्रेशन करवाकर उसके नाम परकरंट अकाउंट खोला जाता था। कंपनी में कई लोगों की नियुक्ति दिखाकर उनकी हर महीने सैलरी भेजी जाती थी। कुछ माह बाद बैंक सैलरी के आधार पर लोन देने का ऑफर दे दिया करते थे।
इसके बाद किसी भी अनजान व्यक्ति की फोटो चिपकाकर लोन के लिए बैंक में फर्जी कागजात के आधार पर आवेदन कर दिया जाता था। सैलरी के आधार पर बैंक भी आंख मूंदकर लोन अप्रूव कर दिया करते थे। लोन की रकम मिलते ही उसे अकाउंट से निकालकर आरोपी आपस में बांट लिया करते थे। इसी तरह इन लोगों ने तीन लाख से 30 लाख रुपये तक की कई बैंकों के साथ ठगी की है। पुलिस ने ठगी का शिकार हुए बैंकों से संपर्क किया है। शिकायतें मिलने के बाद पता चल पाएगा कि आरोपियों ने कितने की ठगी की है। हालांकि आशंका व्यक्त की जा रही है कि इन लोगों ने करोड़ों रुपये की ठगी की है।