दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के कई राज्यों में एटीएम बूथ, मोबाइल टावर और सस्ते टूर पैकेज बेचने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है।
पुलिस ने गिरोह के सरगना हरविंदर और 13 युवतियों समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया। हालांकि, युवतियों को जमानत पर छोड़ दिया गया है।
गिरोह के कब्जे से 57 लाख रुपये के 137 चेक बरामद किए हैं। आरोपी दो साल में देशभर के चार हजार लोगों से 26 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं।
लखनऊ एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि कुछ दिनों से गिरोह के बारे में पता चल रहा था कि वह एनसीआर समेत यूपी, हरियाणा और अन्य प्रदेशों के लोगों को फर्जी कंपनियों के नाम पर चूना लगा रहा है।
एक महीने पहले बिछाया गया जाल
एसटीएफ ने करीब एक माह पहले से साइबर क्राइम के स्पेशियलिस्ट और एसटीएफ के एसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह के नेतृत्व में दिल्ली में जाल बिछाया। भोले-भाले लोगों को ठगने वाले इस गिरोह को शनिवार सुबह दिल्ली में पकड़ लिया गया।
इसमें सरगना हरविंदर सिंह ( निवासी बी-1, प्लॉट नंबर-7, शक्ति खंड इंदिरापुरम, गाजियाबाद) को गिरफ्तार कर लिया गया। इसकी निशानदेही पर नई दिल्ली जामा मस्जिद कामखाना उर्दू बाजार निवासी शारिक, आगरा अटल नगर मुस्तफा क्वार्टर निवासी विष्णु कुमार, दिल्ली के शाहदरा निवासी खालिद, उत्तम नगर निवासी रत्नेश सिंह, अंबेडकर नगर निवासी विशाल, स्वर्ण जयंती पुरम बालाजी निवासी आशीष त्यागी, व कृष्णानगर शिवपुरी निवासी अशोक कुमार और 13 युवतियों समेत कुल बीस आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
युवतियां दिल्ली एनसीआर की रहने वाली थीं जिन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया। वहीं, एसटीएफ लखनऊ ने बाकी आरोपियों को गौतमबुद्ध नगर कोर्ट में हाजिर किया जहां से ट्रांजिट होम लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई।
पढ़े-लिखे भी नहीं समझ पाए ठगी
बरेली के इंदिरानगर अनूप कुमार खंडेलवाल और लखनऊ के कानपुर रोड निवासी विनोद कुमार ने गिरोह के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत पर जांच शुरू हुई तो बड़े गिरोह का खुलासा हो गया।
गिरोह का लक्ष्मी नगर, दिल्ली में ऑफिस था और हर दो तीन माह बाद दफ्तर बदल लिया जाता था। लक्ष्मी नगर में पुलिस ने दो कॉल सेंटर सीज कर दिए हैं।
हरियाणा के एक व्यक्ति ने गिरोह को एटीएम कार्ड पिन नंबर समेत भेजा था, जब 40 हजार रुपये निकाले गए तो उन्होंने अकाउंट बंद कराया। यूपी के एक व्यक्ति ने ब्लैंक चेक दे दिया था। चेक से जब ढाई लाख रुपये निकाले गए तो अकाउंट को बंद कराया था।
रुपये को ठिकाने पर लगाने के लिए हरविंदर ने एनजीओ बना रखा था। कॉल सेंटर पर काम करने वाले लोगों को रुपये देने के बाद जो राशि बचती थी, वह उसे एनजीओ के खाते में भेज देता था जो एक नंबर की राशि हो जाती थी।
ऐसे ऐंठते थे लोगों से रुपये
हरविंदर ने पुलिस को बताया कि उसने सभी 64 कॉल सेंटर को एक साथ जोड़ दिया था। एक कॉल सेंटर पर करीब 10 से 15 लोग रहते थे और हर रोज सभी कॉल सेंटरों के माध्यम से 150 से 200 चेक मंगाए जाते थे।
इन चेक को एक्सिस वैल्यू कार्ड प्राइवेट लिमिटेड के नाम से मंगाया जाता था। जिस कॉल सेंटर से अधिक राशि के चेक आते थे, उसके लाभ का हिस्सा बढ़ा दिया जाता था। उसके एक अकाउंट में करीब 12 करोड़ व दूसरे में करीब 14 करोड़ रुपये का लेन-देन का हिसाब है।
कॉल सेंटरों द्वारा पहले तो टूर के नाम पर फोन किया जाता था, लेकिन जब ज्यादा रिस्पांस नहीं मिलता था तो एटीएम बूथ या मोबाइल टावर फोर जी लगवाने के एवज में हर माह 60 हजार रुपये और एक व्यक्ति को प्रतिमाह सात हजार रुपये का ऑफर दिया जाता था।
कई कंपिनयों के फर्जी नाम का करता था इस्तेमाल
हरविंदर ने जिन 64 कॉल सेंटर को जोड़ रखा था, उनमें कार्यरत लगभग 650 लोग जाने-अनजाने इस गिरोह का साथ दे रहे थे। पुलिस अब इन सभी लोगों पर कार्रवाई करेगी।
आरोपियों के कब्जे से वॉकी-टॉकी के 20 सेट, एक कार, 137 चेक (मूल्य लगभग 57 लाख रुपये), 2600 रुपये, रिलायंस का फर्जी लेटर पैड, रिलायंस थ्री जी का टावर लगाने का एग्रीमेंट, 64 काल सेंटर का डाटा और फर्जी कंपनी के मेमोरेंडम व आर्टिकल की कॉपी बरामद की है।
एसएसपी ने बताया कि सरगना हरविंद्र ने कॉल सेंटर के जरिये एटीएम बूथ लगवाने, मोबाइल टावर लगवाने, रिलायंस के टावर के अलावा इंश्योरेंस समेत अन्य कई कंपनियों के नाम टूर पर भेजने के बहाने से लोगों से चेक मंगवाता था।