देश और विदेशों के सैकड़ों लोगों ने करीब 80 करोड़ रुपये इनकी वर्चुअल करेंसी में निवेश कर दिए, लेकिन जब उनको अपने निवेश का लाभ नहीं मिला, तो मामले की शिकायत पुलिस से कर दी। ठगी का पता चलते ही अपराध शाखा ने फौरन मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।
मामले में रोहित कुमार नामक आरोपी को बुराड़ी स्थित उसके घर से दबोच लिया। रोहित ने बताया कि उनके गैंग के तीन सदस्यों सचिन शैलर, विक्रम मंघेड़ा और ताह कौजी को महाराष्ट्र पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पूरी ठगी का मास्टर माइंड डॉ. अमित लखन पाल करोड़ों रुपये लेकर फरार है। अपराध शाखा की टीम ने उसकी तलाश शुरू कर दी है।
क्या है वर्चुअल करेंसी
वर्चुअल यानी आभासी मुद्रा है। आभासी मतलब अन्य मुद्रा की तरह इसका कोई भौतिक स्वरूप नहीं होता है। यह एक डिजिटल करेंसी है। इस करेंसी को न तो आप देख सकते हैं और न ही छू सकते हैं। यह केवल इलेक्ट्रॉनिक स्टोर होती है। बिटकॉइन भी वर्चुअल करेंसी की तरह होती है।
नौकरी छोड़कर करने लगा जालसाजी
आरोपी रोहित कुमार ने 12वीं कक्षा आजमगढ़ के स्कूल से की थी। इसके बाद इसने पूर्वांचल विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया। 2007 में यह दिल्ली आ गया। यहां इसने कई नामी कंपनियों में नौकरी की। इसके बाद जुलाई 2017 में इसने नौकरी छोड़ दी। यह वर्चुअल क्रिप्टो करेंसी के कारोबार से डॉ. अमित लखन पाल के साथ जुड़ गया।