अगर ग्रेटर नोएडा का रहने वाला आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन जिंदा मिलता है तो इस प्रकार की घटना इस जिले में नई नहीं होगी। इससे मिलती जुलती दो घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। चचूला गांव में महिला की हत्या के आरोप में पति और चाची ने आठ माह जेल काटी थी।
बाद में महिला अपने जीजा के घर से मिली थी। वहीं, एक अन्य मामले में बच्चे के गायब होने पर पांच लोगों को जेल भेजा गया था। वह एक साल बाद तालाब में नहाता मिला था।
25 दिसंबर 2005 को चचूला की महिला के अचानक गायब होने पर उसके मायके वालों ने पति और चाची पर हत्या का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कासना पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस पर ससुराल पक्ष के लोग महिला की तलाश में जुट गए। 28 अगस्त 2006 को महिला अपने जीजा के घर मिली थी।