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नकली सोना गिरवी रखकर ले लेते थे असली गोल्ड

Sun, 02 Nov 2014 08:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली में सोने के बदले लोन देने वाले एक निजी बैंक को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले पांच शातिर बदमाशों को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने दबोचा है। आरोपियों की पहचान किराड़ी निवासी राम प्रकाश (31) सराय रोहिल्ला निवासी विजय मनचंदा (55) इसका बेटा दुष्यंत मनचंदा (20) व नेताजी नगर निवासी शत्रुघ्न नायक (32) और बुद्ध विहार निवासी रविंदर कुमार (40) के रूप में हुई है।
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गैंग नकली सोना गिरवी रखकर बैंक से लोन ले लेता था। बाद में मोटे ब्याज पर पैसों को मार्केट में दे दिया जाता था। पुलिस की मानें तो दो गैंग ने बैंक को करीब 33 करोड़ रुपये का चूना लगाया।

आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त मंगेश कश्यप ने बताया कि निजी बैंक धन महालक्ष्मी के डीजीएम मुरलीधरन ने अक्तूबर में आर्थिक अपराध शाखा को ठगी की शिकायत दी थी। मुरलीधरन के मुताबिक कुछ लोगों ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर उनके बैंक को करीब 33 करोड़ रुपये का चूना लगाया था। बदमाशों ने नकली जेवरात या ऐसे जेवरात जिनमें सोने की मात्रा बहुत कम थी। उसके बदले लोन लिया था।
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पुलिस ने छानबीन शुरू की। जिसमें पता चला कि दो गैंग ने बैंक को चूना लगाया था। एक गैंग को सोमनाथ बोबल व दूसरे को विजय मनचंदा नामक शख्स चला रहा था। दोनों 2010 में बैंक के संपर्क में आए थे। सोमनाथ और उसके 14 साथियों ने 77 मामलों में 21.60 करोड़ रुपये लिए थे।

यह लोन उन्होंने राजधानी के करोल बाग व कनॉट प्लेस बैंक की शाखाओं से लिया था। वहीं विजय मनचंदा ने इसी तरह 11 करोड़ रुपये लिये थे। पुलिस ने विजय मनचंदा व उसके बेटे दुष्यंत समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। बाकी लोगों की पुलिस को तलाश है।

कैसे लगाते थे बैंक को चूना
गैंग के लोग नकली जेवरात या ऐसे जेवरात जिसमें सोने की मात्रा बहुत कम होती थी उसे लेकर बैंक जाते थे। जेवरात का आकलन करने वाला बैंक का सदस्य गैंग से मिला होता था।

वह जेवरात को असली बताते हुए लोन देने सिफारिश कर दिया करता था। लोन लिये रुपये को विजय व सोमनाथ अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया करते थे। बैंक को 12 फीसदी ब्याज की दर से किस्त दी जाती थी। जबकि लोन के रुपयों को 20 से 24 फीसदी ब्याज दर पर चलाकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था। पुलिस को सोमनाथ व उसके गैंग के अलावा बैंक के कुछ लोगों की तलाश है।
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