नई दिल्ली के मध्य प्रदेश भवन सभागार में आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री एवं राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक पं० सुनील भराला के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भेंट की। इस अवसर पर भगवान परशुराम की जन्मभूमि जाना पांव, इन्दौर के जीर्णोद्वार, भगवान परशुराम जन्मभूमि न्यास की स्थापना तथा भगवान परशुराम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की स्थापना पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। बैठक में भगवान परशुराम जी की गौरवमयी परंपरा, उनकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता और आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाने पर सहमति बनी।
भराला ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि भगवान परशुराम की जन्मभूमि का जीर्णोद्वार भगवान राम की जन्मभूमि आयोध्या की तर्ज़ पर देश के सनातनी हिंदू चाहते हैं और साथ-साथ यह भी बताना चाहते हैं कि महाकाल उज्जैन एवं ओमकारेश्वर महादेव की कनेक्टिविटी भगवान परशुराम जी की जन्मभूमि से जोड़ा जाए जिससे श्रद्धालुओं को सुविधाएँ मिल सकें इंदौर जाना पाँव की जगह भगवान परशुराम जन्मभूमि रखा जाए इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई।
सांसद व राष्ट्रीय परशुराम परिषद के वरिष्ठ सदस्य राम भाई मुकिरया
उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य एवं राष्ट्रीय परशुराम परिषद के वरिष्ठ सदस्य अरुण पाठक
राष्ट्रीय परशुराम शोध पीठ के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. राजाराम यादव
पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी, भारत सरकार एवं राष्ट्रीय पदाधिकारी सवितुर प्रसाद
राष्ट्रीय परशुराम परिषद के राष्ट्रीय मंत्री अमित शेखावत
राष्ट्रीय परशुराम परिषद, मध्य प्रदेश के अध्यक्ष कपिल तिवारी
प्रसिद्ध अभिनेता श्री उत्कर्ष भारद्वाज
बैठक के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने यह संकल्प लिया कि भगवान परशुराम जी की जन्मभूमि के गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और शीघ्र ही भगवान परशुराम जन्मभूमि न्यास की औपचारिक स्थापना हेतु आगे की कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी।